विश्व आर्थिक मंच वार्षिक बैठक 2018 – दावोस, स्विट्जरलैंड

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स्विट्जरलैंड के दावोस में इस साल वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की मीटिंग 23 से 26 जनवरी तक होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जनवरी को दावोस जाएंगे,  जहां वे 23 जनवरी को फोरम की बैठक में उद्घाटन भाषण देंगे। करीब दो दशक बाद भारत का कोई प्रधानमंत्री वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की मीटिंग में शामिल होगा।

डब्ल्यूटीओ, आईएमएफ और विश्व बैंक सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों के 38 प्रमुख भी इसमें उपस्थित होंगे। इसके अलावा विभिन्न देशों के 2,000 कंपनियों के सीईओ भी इसमें शिरकत करेंगे। सम्मेलन में सह-अध्यक्षता महिलायें ही करेंगी जिनमें भारत की चेतना सिन्हा और आईएमएफ की क्रिस्टिने लेगार्ड शामिल हैं।

प्रमुख बिंदु

  • 23-26 जनवरी तक होगा वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम दावोस समिट
  • इस साल की थीम ‘Creating a Shared Future in a Fractured World’ यानी “बंटी हुई दुनिया के लिए साझा भविष्य का निर्माण है”
  • बिजनेस, राजनीति, एकेडमिक, पत्रकारिता समेत दूसरे क्षेत्रों के करीब 3,000 लोगों को आमंत्रित किया गया है.
  • दो दशक बाद भारत का कोई प्रधानमंत्री वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की मीटिंग में शामिल होगा.

सम्मेलन में 60 देशों के राष्ट्राध्यक्ष अौर 350 राजनीतिक नेता भाग लेंगे।

दावोस में होने वाली WEF (World Economic Forum) की इस बैठक को अभी दुनिया में आर्थिक गतिविधियों का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। इस बार 60 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, जबकि 350 राजनीतिक नेता इसमें हिस्सा लेंगे। हर देश इस सम्मेलन के जरिये अपनी निवेश के अनुकूल छवि पेश करने की कोशिश करता है। इसके पहले 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने दावोस की बैठक में हिस्सा लिया था।

पीएम मोदी के साथ भारत सम्मेलन में शामिल होंगे ये सदस्य

इस बार विश्व आर्थिक मंच के सम्मेलन में मोदी के साथ उनके 6 केन्द्रीय मंत्री, 2 राज्यों के मुख्यमंत्री और 100 से अधिक कंपनियों के सीईओ सम्मेलन में भाग लेने पहुंचेगे।  आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें सुरेश प्रभु, वित्त मंत्री अरुण जेटली, रेल मंत्री पीयूष गोयल, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर शामिल हैं।

मोदी के नेतृत्व में इस सम्मेलन में भाग लेने वाला यह चौथा सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल होगा। इसमें अमेरिका का सबसे बड़ा 780 सदस्यों का, ब्रिटेन से 266, स्विटजरलैंड से 233 और चीन से 118 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भाग लेगा।

स्विटजरलैंड के राष्ट्रपति एलेन बरसेट के साथ होगी द्विपक्षीय वार्ता

‘पीएम मोदी की दावोस में स्विटजरलैंड के राष्ट्रपति एलेन बरसेट के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी होगी। इसमें जेटली के अलावा अन्य वरिष्ठ मंत्री भी शामिल हो सकते हैं।’ जाहिर है कि भारत और स्विटजरलैंड के बीच कालेधन से जुड़ी सूचनाओं को साझा करना का नया समझौता हुआ है। जिसके के मुताबिक, जल्द ही दोनों देश एक-दूसरे को बैंकिंग से जुड़ी सूचनाओं को साझा करना शुरू करेंगे। माना जा रहा है इससे काले धन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

20 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का दौरा

यह 20 साल बाद किसी पहले भारतीय प्रधानमंत्री का दावोस दौरा होगा। इससे पूर्व 1997 में  प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और 1994 में प्रधानमंत्री नरसिंहराव यहां गए थे। गौरतलब है कि मोदी और ट्रंप पिछले साल दो बार मिल चुके हैं। पहली मुलाकात वॉशिंगटन डीसी में और दूसरी मुलाकात आसियान बैठक के दौरान हुई थी और इस साल 2018 की शुरुआत में दोनों की फिर से मुलाकात होने जा रही है। दोनों शीर्ष नेताओं की ये मुलाकात भारत के संदर्भ में काफी अहम माना जा रहा है।

लाभ

भारत को निवेशक मिलेंगे। विदेशी कम्पनी को नए टैक्स कानूनों का फायदा मिलेगा। लेकिन बाजार और जनसंख्या दोनों भारत में हैं, इसका फायदा भारत को जरूर मिलेगा, यही वजह है कि निवेशकों के लिहाज से भारत की अनदेखी नहीं की जा सकती।

SOURCE – https://www.jagran.com/news/national-us-president-donald-trump-will-attend-the-world-economic-forum-in-davos-a-meeting-with-prime-minister-narendra-modi-17335480.html

2 Comments

  1. Приветствую всех!
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