सब्जी उत्पादन (Vegetable production)

सब्जी उत्पादन (Vegetable production)

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उद्यान विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत सब्जियों का अध्ययन किया जाता है, उसे सब्जी उत्पादन या शाकोत्पदान (Olericulture) कहते है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 300 ग्राम सब्जियों (115 ग्राम पत्तियों वाली, 70 ग्राम जड़ वाली तथा 115 ग्राम अन्य) का उपभोग करना चाहिए।

विभिन्न सब्जियों में पाए जाने वाले प्रमुख खनिज तत्त्व 

विटामिन-A (रेटिनॉल) से युक्त प्रचुर सब्जियाँ 

  1. चुकंदर की पत्तियाँ (Beet leaf)
  2. विलायती पालक पत्तियाँ (Spinach leaf)
  3. कोलोकेशिया की पत्तियाँ (Colocasia leaf)
  4. धनियाँ की पत्तियाँ (Coriander leaf)
  5. मेथी की पत्तियाँ (Fenugreek leaf)

विटामिन B1, (थाइमीन) से युक्त प्रचुर सब्जियाँ 

  1. मिर्च (Chillies)
  2. कोलोकेशिया की पत्तियाँ
  3. टमाटर (Tomato) (0.12 मिग्रा/100 ग्राम)

विटामिन B2, (राइबोफ्लेविन) से युक्त प्रचुर सब्जियाँ 

  1. मेथी की पत्तियाँ
  2. अमेरेन्थस

विटामिन-C (एस्कॉर्बिक अम्ल) से युक्त प्रचुर सब्जियाँ 

  1. ड्रमस्टिक पत्तियाँ (Drumstick Leaves)
  2. धनिया की पत्तियाँ
  3. मिर्च (Chillies)
  4. टमाटर

सब्जियों में रंग, कड़वापन, गंध व खटास का कारण

लहसुन में गंधएलाइसिन (डाइ एलाइल डाइ सल्फाइड)
मूली में तीखापनआइसोसाइनेट (isocyanate)
तिलहन के तेल में पीला रंगकैरोटिनाइज़्ड (एलाइल आइसो थायोसाइनेट )
आलू में हरा रंगसोलेनिन
गाजर का नारंगी रंगकैरोटिन
गाजर में लाल रंगएन्थोसायनिन
मिर्च में लाल रंग
कैप्सेनथिन
टमाटर का लाल रंगलाइकोपिन
हल्दी में पीला रंग
कुरकुमिन
प्याज में लाल रंगएन्थोसाइनिन
प्याज में पीला रंगक्वेरसिटीन
आलू का हरा रंगसोलेनिन
सूरजमुखी के तेल में कसैलापनऑक्सीडेशन
खेसारी से लकवा/गठियान्यूटोक्सिन/लेथ्रोजन
चने का पत्ती में खटासऑक्जेलिक अम्ल (Oxalic acid)
अरबी में कनकनाहटकैल्सियम ऑक्सलेट
पीपर में गंधओलियोरेसिन (Oleoresin)
प्याज में गंध एलाइल प्रोपाइल डाइसल्फाइड (Allyl propyl disulfide)
करेले में कड़वाहटमेमोर्डिकोसाइट/टेट्रासाइक्लिक ट्राइ टरपाइन
खीरे में कड़वाहटकुकरबिटेसिन
मिर्च में चरपराहट केप्सेसिन (Capsaicin)
शलजम में चरपराहटकैल्सियम ऑक्सलेट (Calcium oxalate)

कुछ प्रमुख सब्जियाँ निम्नलिखित है:

 आलू (Potato)

  • वानस्पतिक नाम: सोलनम ट्यूबरोसम (Solanum tuberosum)
  • मूल स्थान: पेरू (दक्षिण अमेरिका)

आलू (Potato) को विश्व के सबसे मुख्य भोज्य पदार्थों में चौथा स्थान प्राप्त है। चावल सबसे मुख्य भोज्य पदार्थ है, इसके बाद गेहूँ एवं मक्का का स्थान आता है।

17वीं शताब्दी में पुर्तगालियों (Portuguese) द्वारा आलू को भारत में लाया गया था। चीन आलू का सर्वाधिक उत्पादक राष्ट्र है।

आलू (potato) में 22.6% तक कार्बोहाइड्रेट (starch) पाया जाता है। आलू (potato) में लोहा तत्वों की मात्रा, मैग्नीशियम एवं विटामिन C का अच्छा स्रोत है।

आलू में सोलेनीन (solenin), चाकोनीन (chaconein) तथा ग्लाइको एल्केलॉयड (glyco alkaloids) जैसे हानिकारक पदार्थ पारिस्थितिकी स्थितियों के कारण उत्पन्न हो जाते है।

केन्द्रीय आलू अनुसंधान केन्द्र, शिमला (Himachal Pradesh) के कुफरी में अवस्थित होने के कारण यहाँ खोजी गयी किस्मों को ‘कुफरी’ नाम से जाना जाता हैं।

आलू की प्रमुख प्रजातियाँ (Major species of potato)

  • अप-टू-डेट, कुफरी अलंकार, कुफरी बहार, कुफरी चन्द्रमुखी, कुफरी बादशाह, कुफरी नीलिमा, कुफरी फ्राइसोना आदि।
  • भागीरथी नदी घाटी में आलू और राजमा की कृषि फ्रेडरिक विल्सन (Frederick Wilson) द्वारा शुरू की गयी थी।

आलू की प्रजाति के प्रमुख रोग (Major diseases of potato species)

  • झुलसा (Late Blight) आलू की फसल का एक प्रमुख रोग है।
  • अगेती अंगमारी (Alternaria solnai) तथा पछेती अंगमारी (Phytophthora infestans) आलू की फसल में होने वाले मुख्य कवक जनित रोग हैं।

टमाटर (Tomato)

  • वानस्पतिक नाम: लाइकोपोर्सिकान एस्कुलेंटम (Lycoporsican esculentum)
  • कुल: सोलोनेसी (Solanaceae)

टमाटर (Tomato) में कैल्शियम, पोटैशियम, सोडियम, फास्फोरस तथा विटामिन C प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। टमाटर को 17वीं शताब्दी में पुर्तगालियों द्वारा भारत में लाया गया।

पूसा शीतल, पूसा H1, हिसार अरून, अत्यन्त अगेती, अर्का मेघालय, पंजाब छुआरा, पूसा रूबी, अंगूरलता, अर्का सौरभ आदि टमाटर की प्रमुख प्रजातियाँ है।

बोरॉन की कमी (boron deficiency) के कारण टमाटर के फल फट हैं तथा ‘लीफ कर्ल (leaf curl)’ टमाटर में होने वाला एक प्रमुख वाइरस जनित रोग है।

अन्य सब्जियों से सम्बंधित प्रमुख तथ्य (Key facts related to other vegetables)

बैंगन (Brinjal), विटामिन B का एक मुख्य स्रोत है।  भारत में बी.टी बैंगन (Bt Brinjal) की कृषि पर रोक है, क्योंकि इसके उपभोग से स्वास्थ्य और जैव विविधता पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

  • पूसा संबंध व पूसा मुक्ता, पत्तागोभी (Cabbage) की प्रमुख प्रजातियाँ हैं।
  • पूसा केतकी, पूसा दीपाली, हवाइट स्नोवाल, पूसा हिम ज्योति आदि फूलगोभी (Cauliflower) की प्रमुख प्रजातियाँ हैं।
  • ‘पूसा संयोग (Pusa Sanyog)’, खीरे (Cucumbers) की प्रमुख प्रजातियाँ हैं।
  • पूसा नवीन, पूसा मेघदूत, सम्राट आदि लौकी (Gourd) की प्रमुख प्रजातियाँ हैं।
  • राष्ट्रीय अनुसंधान केन्द्र पुणे (महाराष्ट्र) में प्याज व लहसुन से सम्बंधित कार्य  किए जाते है।

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