Important facts related to Uttarakhand Panwar Dynasty

उत्तराखंड – पंवार वंश से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 4)

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  • वर्ष 1946 में देवप्रयाग (टिहरी) में हिमालय नक्षत्र वैद्यशाला की स्थापना की गयी थी।
  • गुरु गोविन्द सिंह और गढ़ नरेश फतेहशाह के मध्य पांवटा के निकट भगाणी नामक स्थल पर युद्ध हुआ।
  • सुदर्शन शाह ने अपने दरबार में चैतु और माणकू नामक चित्रकारों को आश्रय दिया था।
  • उत्तराखंड में राजस्व एकत्रित करने वाले अधिकारी को थोकदार या जमीदार को स्थानीय भाषा में क्या कहा जाता था – सयाणा, कर्माण या गुढेरे
  • पंवार वंश के शासनकाल  में चण्ड नामक व्यक्ति का मुख्य कार्य क्या था – संदेशवाहक
  • ग्रामीणों के करों को एकत्रित कर थोकदार (जमीदार) कौन सौंपता था – पधान (प्रधान)
  • राजा को विशिष्ट मुद्दों पर सलाह किसके द्वारा दी जाती थी – नेगी
  • पंवार वंश के किस शासक के समय श्रीदेव सुमन की मृत्यु हुई थी – नरेन्द्रशाह
  • बग्वाली पोखर के युद्ध में किस शासक पंवार वंश के शासक ने मोहनचंद को परास्त किया था – ललित शाह 
  • पंवार वंश का शासक अजयपाल किस संप्रदाय से सम्बन्धित था  – नाथ संप्रदाय 
  • पंवार वंश के शासक फतेहपति शाह के दरबार में नवरत्न मौजूद थे।
  • फतेहपति शाह के शासनकाल में गुरु रामराय ने धामावाला देहरादून में झण्डा दरबार साहिब गुरुद्वारा का निर्माण किया था।
  • प्रदीप शाह के शासनकाल में कवि मेधाकर ने प्रदीप रामायण नामक ग्रन्थ की रचना की थी।
  • वर्ष 1791 लंगूरगढ़ के मैदान में गोरखाओंप्रद्युम्न शाह के मध्य प्रथम युद्ध हुआ था।
  • वर्ष 1804 में गोरखाओं और प्रद्युम्न शाह के मध्य खुड़बुड़ा का युद्ध हुआ था, जिसमें लड़ते हुए प्रद्युम्न शाह वीरगति को प्राप्त हुए।
  • पवार वंश के शासनकाल में आय-व्यय का अधिकारी दीवान होता था।
  • परगने में नियुक्त अधिकारी को फौजदार कहा जाता था।
  • पवार वंश के शासनकाल में सैनिकों को दी जाने वाली वीर भूमि को रौत कहा जाता था।
  • पवार वंश के शासनकाल में राजधानी की सुरक्षा का दायित्व गोलदार का होता था।
  • पृथ्वीपति शाह प्रथम शासक था जिसने राजगढ़ी नामक स्थान को अपनी द्वितीय राजधानी बनाया, तथा दिलीप शाह को वहां का शासक नियुक्त किया।
  • किस पंवार वंश के शासक मानशाह ने सर्वाधिक 7 बार चंद शासक लक्ष्मीचंद  को पराजित किया था।
  • बोलांदा बद्रीश के नाम से पंवार शासकों को जाना जाता है।
  • पवार वंश के शासनकाल में राजा के बाद दूसरा सबसे बड़ा सर्वोच्च पद बजीर या मुख्तार था।

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