Uttarakhand D.El.Ed Exam Answer Key (Hindi) – 4 December 2020

Uttarakhand DElEd Entrance ExamAnswer Key - 04 December 2020

181. शिक्षक छात्रों में समस्या सुलझाने तथा तार्किक योग्यताओं का विकास निम्नलिखित के द्वारा कर सकते है
(A) महत्त्वपूर्ण प्रश्न पूछकर।
(B) पुस्तक से शब्दशः दिए गए उत्तर को अस्वीकार कर।
(C) प्रश्न पूछते समय ‘अगर…….मगर’ दृष्टिकोण पर बल देकर।
(D) उच्च स्तर का उत्तर देने पर बल देकर।

182. बालकों को परिश्रम करने के लिए प्रेरित करने का सर्वोत्तम उपाय है .
(A) स्वयं परिश्रम किया जाए, जिसे देखकर बालक स्वतः प्रेरित होंगे।
(B) परिश्रम के महत्व पर व्याख्यान दिया जाए।
(C) परिश्रम द्वारा सफलता प्राप्त करने वालों के उदाहरण दिए जाएँ।
(D) परिश्रमी बालकों को पुरस्कार दिया जाए।

183. शिक्षण में छात्रों की सर्वाधिक भागीदारी संभव है
(A) व्याख्यान विधि द्वारा
(B) चर्चा विधि द्वारा
(C) पुस्तक विधि द्वारा
(D) श्रव्य-दृश्य सामग्री द्वारा

184. शिक्षक होने के नाते आप अपने छात्रों से कैसा सम्बन्ध रखना चाहता
(A) मित्रवत्
(B) पुत्रवत्
(C) एक परिचित व्यक्ति जैसा
(D) छात्र की आयु के अनुरूप

185. यदि पीछे बैठने वाले छात्र सदैव बातचीत में ही व्यस्त रहते हों तो अध्यापक को
(A) उन्हें जो कुछ वे कर रहे हैं, करने दें।
(B) उन्हें दण्ड दें।
(C) उन्हें आगे बैठाएँ और उन पर नज़र रखें।
(D) उपरोक्त में से कोई नहीं।

186. अधिकांश छात्र उन शिक्षकों से पढ़ने के लिए इच्छुक होते हैं जो –
(A) उसके पहले भी उन्हें पढ़ा चुके हों।
(B) स्कूल में अति योग्य शिक्षक माने जाते हों।
(C) उन्हें प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले लगते हों।
(D) जो छात्रों की समस्याएँ हल करने में रूचि रखते हों।

187. विद्यार्थी अध्यापक का सर्वाधिक आदर करेंगे, यदि –
(A) वह अपने कार्य के प्रति निष्ठावान है।
(B) वह अनुशासन लागू करने में सफल होता है।
(C) वह विद्यार्थियों के साथ मित्रवत् है।
(D) वह अपना प्रभुत्व दृढ़तापूर्वक प्रकट करता है।

188. अध्यापन प्रारंभ करने से पूर्व शिक्षक को चाहिए कि
(A) वह अपने विद्यार्थियों के वर्तमान तथा भूत के विषय में जाने।
(B) वह विद्यार्थियों के मस्तिष्क में काम कर रहे वातावरण के विचलनों से भिज्ञ हो।
(C) वह अपने विद्यार्थियों की जिज्ञासा को उजागर करने में सक्षम हो।
(D) उपर्युक्त सभी

189. शिक्षण का पहला चरण है
(A) पहले से योजना बनाना।
(B) पाठ्य-सामग्री को सुसंगठित करना।
(C) विद्यार्थियों की पृष्ठभूमि को जानना।
(D) इनमें से कोई नहीं।

190. कल्पना कीजिए कि आप एक महत्वाकांक्षी अध्यापक हैं। आप कक्षाध्यापन के विषय में अत्यंत ऊँचा
आदर्श रखते हैं, किन्तु आपका कठिन परिश्रम कारगर नहीं होता। इस समस्या के पीछे कारण हो सकता है कि
(A) आपके शिक्षण का स्तर विद्यार्थियों की क्षमता से अधिक ऊँचा है।
(B) छात्रों के मध्य जो व्यक्तिगत भिन्नता है, वह आपके प्रयास को नष्ट कर देती है।
(C) (A) और (B) दोनों
(D) (A) और (B) में से कोई नहीं

191. सीखने का सबसे समुचित तात्पर्य है
(A) ज्ञान देना
(B) व्यवहार में परिवर्तन
(C) व्यक्तिगत रूप से माहौल में ढलना
(D) हुनर की प्राप्ति

192. कक्षा-शिक्षण में श्रव्य-दश्य सामग्री के उपयोग का सबसे बड़ा लाभ है
(A) छात्रों को पुस्तकीय ज्ञान पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है।
(B) सीखना, सरल और रोचक हो जाता है।
(C) सीखने का सारा दायित्व छात्र पर निर्भर होता है।
(D) छात्रों को कम अध्ययन करना पड़ता है।

 

193. शिक्षक को आशावादी क्यों होना चाहिए
(A) वह विनोदप्रिय बन सकेगा।
(B) वह अपने छात्रों को भी आशावादी बना सकेगा।
(C) वह छात्रों में अच्छी आदतें डाल सकेगा।
(D) वह कक्षा को अनुशासनप्रिय बना सकेगा।

194. शरारती छात्रों के साथ शिक्षक का व्यवहार होना चाहिए
(A) कठोर
(B) विनम्र, किन्तु दृढ़
(C) तटस्थ
(D) सहानुभूतिपूर्ण

 

195. कक्षा-शिक्षण की व्यवस्था निर्भर करती है
(A) प्रधानाचार्य की शैक्षिक योग्यता पर
(B) शिक्षक की व्यावसायिक निपुणता पर
(C) अन्य शिक्षकों के सहयोग पर
(D) विद्यालय की साज सज्जा पर

  

196. यदि छात्रों का शैक्षिक रिकॉर्ड अत्यधिक उत्तम है, तो शिक्षक को निम्नलिखित कार्य करने की आवश्यकता
(A) वह केवल छात्रों को अधिगम प्रणाली के खोजने में सहायता करे तथा उन्हें संदर्भ सूची प्रदान करे।
(B) छात्रों को प्रस्तुतीकरण में मदद करे, किन्तु उन्हें उसकी तैयारी स्वतंत्र रूप से करने दे।
(C) छात्रों को स्वयं तैयार करने के पर्याप्त अवसर दे तथा उन्हें स्वनिर्देशित होने दे।
(D) छात्रों की तैयारियाँ पाठ्यपुस्तकीय मात्र तो नहीं हैं, इसका निरीक्षण करे।

197. यदि विद्यार्थी यह न समझे कि कक्षा में क्या पढ़ाया गया है, तो शिक्षक क्या अनुभव करेगा
(A) भारी ऊबा हुआ
(B) उसे दूसरे तरीके से समझाना चाहिए
(C) वह व्यर्थ समय नष्ट कर रहा है
(D) विद्यार्थियों के लिए अफसोस

198. शिक्षक द्वारा दिए जाने वाले गृहकार्य की मात्रा एवं प्रकार का निर्धारण करना चाहिए
(A) छात्रों के मतों द्वारा
(B) विषय वस्तु की जटिलता द्वारा
(C) गृहकार्य से उत्पन्न होने वाले अधिगम द्वारा
(D) कक्षा के कालांश द्वारा

199. शिक्षा के क्षेत्र में ली जाने वाली परीक्षा से हम जान सकते हैं कि
(A) विद्यार्थी कितना बुद्धिमान है।
(B) अध्यापक द्वारा पढ़ाया गया सम्बोध विद्यार्थी किस प्रकार प्रस्तुत करता है।
(C) विद्यार्थी पूर्व वर्ष में किए गए कार्य का कितना भाग याद कर सकता है।
(D) विद्यार्थी का शैक्षिक विकास सही दिशा में हो रहा है अथवा नहीं।

200. जो अध्यापक कक्षा-अध्यापन में उत्साही होते हैं
(A) उनमें प्रायः विषयों की प्रवीणता का अभाव होता है, जो उनके उत्साह के नीचे छिपा रहता है।
(B) वे छात्रों का ध्यान खींचने के लिए केवल नाटकीय रूप दे देते हैं।
(C) वे अपने छात्रों को अध्यापन-अधिगम की प्रक्रिया के अन्तर्गत कर लेते हैं।
(D) उनमें उपरोक्त सभी बातें होती हैं।

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