UPTET 2013 – Paper – I (Hindi Language) Answer Key

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परीक्षा (Exam) – UPTET (UttarPradesh Teacher Eligibility Test) Paper I (Classes I to V)
भाग (Part) – Part – II – हिन्दी भाषा (Hindi Language)
परीक्षा आयोजक (Organized) –  UPBEB

कुल प्रश्न (Number of Question) – 30
परीक्षा तिथि (Exam Date) – 2013


निर्देश (प्र. सं. 1-9) नीचे दिए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प चुनिए।

स्थूल एवं बाह्य पदार्थ एवं मानसिक पदार्थों एवं भावों की अपेक्षा अधिक महत्व के विषय नहीं है। जो व्यक्ति रचनात्मक कार्य करने में समर्थ है, उसे भौतिक स्थूल लाभ अथवा प्रलोभन न तो लुभाते हैं और न ही प्रोत्साहित करते हैं। विश्व में विचारक दस में से एक ही व्यक्ति होता है। उसमें भौतिक महत्वाकांक्षाएँ अत्यल्प होती हैं। ‘पूँजी’ का रचयिता कार्ल मार्क्स जीवनभर निर्धनता से जूझता रहा। राज्या’धकारियों ने सुकरात को मरवा डाला, पर वह जीवन के अन्तिम क्षणों में भी शान्त था, क्योंकि वह अपने जीवन के लक्ष्य का भली-भाँति निर्वाह कर चुका था। यदि उसे पुरस्कृत किया जाता, प्रतिष्ठा के अम्बारों से लाद दिया जाता, परन्तु अपना काम न करने दिया जाता तो निश्चय ही वह अनुभव करता कि उसे कठोर रूप में दण्डित किया गया है। ऐसे अनेक अवसर आते हैं जब हमें बाहरी सुख-सुविधाएँ आकर्षित करती हैं, वे अच्छे जीवन के लिए अनिवार्य लगने लगती हैं, किन्तु महत्वपूर्ण यह है कि क्या हमने जीवन का उद्देश्य प्राप्त कर लिया? यदि इसका उत्तर हाँ है, तो बाह्य वस्तुओं का अभाव नहीं खलेगा और यदि नहीं है, तो हमें अपने को भटकने से बचाना होगा और लक्ष्य की ओर बढ़ना होगा।

Q31. मनुष्य को बाहरी सुख क्यों लुभाते हैं?
(1) भरे-पूरे जीवन के लिए
(2) सम्पन्नता के लिए
(3) अच्छे जीवन के लिए
(4) आराम के लिए

Q32. “जो व्यक्ति रचनात्मक कार्य करने में समर्थ हैं……..।” वाक्य में रेखांकित शब्द के स्थान पर कौन-सा शब्द प्रयुक्त नहीं किया जा सकता है?
(1) सक्षम
(2) क्षमतावान
(3) शक्तिशाली
(4) सामर्थ्यवान

Q33. ‘प्रतिष्ठा के अम्बारों से लाद दिया जाता।’ रेखाकत का तात्पर्य है
(1) आभार से
(2) ढेर से
(3) कृतज्ञता से
(4) भार से

Q34. ‘भली-भाँति निर्वाह कर चुका था।’ उपरोक्त वाक्यांश में क्रिया-विशेषण है
(1) निर्वाह
(2) भली-भांति
(3) कर चुका
(4) भली

035. ‘महत्वाकांक्षा’ किन शब्दों से मिलकर बना है?
(1) महत्व + आकांक्षा
(2) महत्त्व + आकांक्षा
(3) महत्त्व + कांक्षा
(4) महत् + आकांक्षा

Q36. भौतिक लाभ किन्हें नहीं लुभाते?
(1) जीवन का लक्ष्य पूरा करने वालों को
(2) सामर्थ्यवान लोगों को
(3) रचनात्मक कार्य करने वालों को
(4) धन-सम्पन्न लोगों को

Q37. ‘पूँजी’ का रचयिता कार्ल मार्क्स कथन से संकेत मिलता है कि ‘पूँजी’ का अर्थ है
(1) एक ग्रन्थ
(2) एक विचार
(3) विरासत
(4) धन-सम्पत्ति

Q38. विचारकों की एक विशेषता यह है कि उनमें
(1) पद-प्रतिष्ठा प्राप्त करने की इच्छा होती है
(2) भौतिक महत्त्वकांक्षाएँ कम होती हैं
(3) रचनात्मक कार्य करने की क्षमता होती है
(4) महत्त्वाकांक्षाएँ नहीं होती

Q39. सुकरात को अपना काम न करने देने की स्थिति कठोर दण्ड जैसी प्रतीत होती, क्योंकि
(1) वह स्थूल प्रलोभनों की अपेक्षा नहीं करता था
(2) वह जीवन के कार्य समाप्त कर चुका था
(3) उसे जीवन का उद्देश्य प्राप्त करने में रोक दिया गया होता
(4) वह अन्तिम क्षणों में भी शान्त था

निर्देश (प्र. सं. 10-15) निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।

रोना और मचल जाना भी क्या आनन्द दिखाते थे।
बड़े-बड़े मोती से आँसू, जयमाला पहनाते थे।
मैं रोई, माँ काम छोड़कर आई, मुझको उठा लिया।
झाड़-पोछकर चूम-चूम गीले गालों को सुखा दिया।
आजा बचपन! एक बार फिर दे-दे अपनी निर्मल शान्ति।
व्याकुल व्यथा मिटाने वाली, वह अपनी प्राकृत विश्रान्ति वह भोलीसी मधुर सरलता, वह प्यारा जीवन निष्पाप।
क्या फिर आकर मिटा सकेगा तू मेरे मन का सन्ताप?
मैं बचपन को बुला रही थी, बोल उठी बिटिया मेरी।
नंदनवन-सी फूल उठी, यह छोटी-सी कुटिया मेरी।

Q40. ‘बचपन’ शब्द है
(1) क्रिया-विशेषण
(2) विशेषण
(3) सर्वनाम
(4) संज्ञा

Q41. ‘नन्दन-वन-सी फूल उठी, यह छोटी-सी कुटिया मेरी’ का भाव है
(1) कुटिया में आनन्द उमड़ उठा
(2) कुटिया सुन्दर हो गई।
(3) कुटिया में शान्ति छा गई
(4) छोटी कुटिया बड़ी हो गई

Q42. ‘मिटा सकेगा तू मेरे मन संताप?’ उक्त पंक्ति में ‘तू’ किसे कहा गया है?
(1) कवि को
(2) बचपन को
(3) पाठक को
(4) बच्चे को

Q43. कवयित्री अपने बचपन को क्यों बुलाना चाहती है?
(1) बचपन के आनन्द की याद में
(2) अपनी बिटिया की याद में
(3) बचपन के खेलों की याद में
(4) अपनी माँ की याद में

Q44. बच्चे की आँखों से निकलते आँसुओं को देखकर क्या अनुभूति होती है?
(1) विजय की
(2) सुख की
(3) प्यार की
(4) कष्ट की

Q45. ‘व्याकुल व्यथा मिटाने वाली’ में प्रयुक्त अलंकार
(1) उपमा अलंकार
(2) रूपक अलंकार
(3) अनुप्रास अलंकार
(4) यमक अलंकार

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