thermal theory of origin of monsoon

मानसून की उत्पत्ति का तापीय सिद्धांत

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मानसून की उत्पत्ति के तापीय सिद्धांत के अनुसार, मानसूनी पवनों (Monsoon winds) की उत्पत्ति का प्रमुख कारण ताप (Heat) है। ग्रीष्म ऋतु में सूर्य की किरणें उत्तरी गोलार्द्ध में लम्बवत (Perpendicular) पड़ती हैं। जिससे उत्तरी गोलार्द्ध में वृहत निम्न दाब (Low Pressure) का निर्माण होता है, जिसके कारण उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें (Northeast trade winds) अनुपस्थित हो जाती हैं जो कि 5° से 30° उत्तरी (northern) एवं दक्षिणी अक्षांशों (Southern latitudes) के मध्य वर्षभर चलती हैं।

तापीय विषुवत रेखा (Equatorial line) उत्तर की ओर खिसक जाती है, जिस कारण उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें (North-eastern trade winds) विषुवत रेखा (Equatorial line) को पार कर उत्तरी गोलार्द्ध में आ जाती हैं।

फेरेल के नियमानुसार, उत्तरी गोलार्द्ध (Northern hemisphere) में बहने वाली पवनें दाहिनी दिशा (Right Hand Side) अर्थात् उत्तर-पूर्व की ओर मुड़ जाती हैं तथा संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवाहित होने लगती हैं। यह पवनें लम्बे समुद्री पथ से होकर आती हैं अत: ये जलवाष्प युक्त होती हैं।

मानसूनी पवनें दक्षिणी तथा पश्चिमी दो भागों में विभाजित होकर भारतीय उपमहाद्वीप में वर्षा होती हैं।

  1. अरब सागर शाखा (Arabian Sea Branch) – इसके द्वारा पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल पर वर्षा होती हैं।
  2. बंगाल की खाड़ी शाखा (Bay of Bengal branch) – इसके द्वारा अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह  (Andaman-Nicobar Islands) एवं उत्तर-पूर्वी भारत में भारी वर्षा होती है।

बंगाल की खाड़ी शाखा उत्तर-पश्चिमी भारत के निम्न दाब क्षेत्र की ओर अभिसरित होती है, तथा पूर्व से पश्चिम की ओर जलवाष्प की कमी के साथ ही वर्षा की मात्रा में भी कम होती जाती है।

शीत ऋतु (Winter season) में सूर्य की किरणें मकर रेखा (Tropic of Capricorn) पर सीधी पड़ती हैं, जिससे उत्तर-पश्चिमी भारत के क्षेत्र में अरब सागर (Arabian Sea) व बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) की तुलना में अधिक ठण्ड होने के कारण उच्च दाब के क्षेत्र का निर्माण होता है, जबकि अरब सागर (Arabian Sea) तथा बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में निम्न वायु दाब क्षेत्र का निर्माण होता है, जिस कारण मानसूनी पवनें उच्च वायु दाब से निम्न वायु दाब की ओर प्रवाहित होने लगती हैं।

शीत ऋतु (Winter season) में उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें (North-eastern trading winds) पुनः प्रवाहित होने लगती हैं। इन पवनों द्वारा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में मानसूनी वर्षा होती हैं तथा यह पवनें बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) से जलवाष्प ग्रहण कर तमिलनाडु (Tamilnadu) के तटीय क्षेत्र वर्षा करती हैं, जिसे लौटते मानसून की वर्षा कहा जाता है।


व्यापारिक पवनें (Trade Winds)

व्यापारिक पवनें, उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांशों में 5° से 30° के मध्य प्रवाहित होती हैं जो उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर प्रवाहित होती हैं।


 

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