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समता का अधिकार : अनुच्छेद (14-18)

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अनुच्छेद (14) – विधि के समक्ष समता और विधियों का सामान संरक्षण 

अनुच्छेद 14 के अंतर्गत यह व्यवस्था की गई है कि भारत के किसी भी राज्यक्षेत्र किसी भी व्यक्ति (विदेशी या भारतीय नागरिक) को विधि के समक्ष समता से या विधियों समान संरक्षण से वंचित नहीं किया जाएगा। भारतीय संविधान में समानता अधिकार – इंग्लैंड से और विधि का समान संरक्षण – अमेरिका से लिया गया है।

अनुच्छेद (15) – राज्य द्वारा  धर्म, जाति, लिंग और जन्म स्थान आदि के आधार पर विभेद का प्रतिषेध  

  1. राज्य धर्म के आधार पर विभेद / भेदभाव नहीं करेगा ।

  2. राज्य सार्वजनिक स्थानों के संदर्भ में भेदभाव नहीं करेगा। जैसे- सार्वजनिक स्थल, मनोरंजन स्थल आदि।

  3. इसे  अनुच्छेद (15) का अपवाद भी कहते है क्योंकि  इसके अंतर्गत स्त्रियों और बच्चो के लिए विशेष प्रावधान किये गए है। जैसे – राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन , विशेष संस्थाओ की स्थापना , सामाजिक व शैक्षणिक रूप से

  4. 93 वें संविधान संसोधन अधिनियम 2006 के तहत शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान किए गए है।  जिसके तहत अनुसूचित जाति (SC) , अनुसूचित जनजाति (ST), अलपसंख्यक वर्गों (OBC) के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

  5. इसके अंतर्गत उच्च शिक्षण संस्थानों में भी आरक्षण का प्रावधान किया गया है। वर्तमान में  अनुसूचित जाति (SC) – 15%, अनुसूचित जनजाति (ST) – 7.5%, अलपसंख्यक वर्गों (OBC) – 27% आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

यह अधिकार केवल भारत के नागरिको को प्राप्त है विदेशी नागरिको को नहीं।

अनुच्छेद (16) – लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता 

  1. राज्य नागरिकों को धर्म , जाति , लिंग , जन्मस्थान , निवास स्थान के  आधार पर भेदभाव नहीं करेगा, परंतु इसके अपवाद स्वरुप धार्मिक संस्थाओ में धर्म के आधार पर नियुक्ति की जा सकती है । जैसे- मंदिर मस्जिद के लिए सरकार ने ट्रस्ट बनवाए है और उनमे नियुक्तियों का अधिकार विशेष धर्म के लोगो को ही प्रदान किया है।

  2. संसद पिछड़े क्षेत्रों से संबंधित मामलो में निवास के स्थान पर आरक्षण का प्रावधान कर सकती है । वर्तमान समय में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को छोड़कर किसी अन्य राज्य के लिए यह व्यवस्था नहीं है।

  3. संसद नियुक्तियों में भी आरक्षण की व्यवस्था कर सकती है ।

मंडल आयोग (Mandal Commission)

वर्ष 1979 में मोरारजी देसाई की सरकार द्वारा  B.P मंडल की अध्यक्षता में पिछड़ा वर्ग  आयोग का गठन किया गया। इसने अपनी रिपोर्ट में पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए सरकारी नौकरियों में 27% आरक्षण की मांग की। अत: वर्ष 1990 में V.P सिंह सरकार द्वारा OBC के लिए सरकारी नौकरियों में 27% आरक्षण की घोषणा की गयी।

NOTE :

77 वें संविधान संसोधन अधिनियम 1955 के अंतर्गत अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था की गई जिसमे पिछड़ा वर्ग (OBC) शामिल नहीं है। 

अनुच्छेद (17) – अस्पृश्यता का अंत

राज्य सार्वजानिक पूजा स्थल , दार्शनिक स्थल , सार्वजानिक मनोरंजन स्थल , अस्पताल , शैक्षणिक संस्थान आदि किसी भी तरह की अस्पृश्यता का अंत करेगा।

अनुच्छेद (18) – उपाधियों का अंत 

  1. भारत सरकार ने अनुच्छेद 18  के द्वारा जमींदार , राजा , महाराजा जैसे आदि स्वतंत्र उपाधियों का अंत कर दिया और सभी को सामान अधिकार दिया , परंतु देश की सेवा और सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालो की उपाधियों को बनाए रखा। जैसे – भारत रत्न , कीर्ति चक्र , परमवीर चक्र , पदम् भूषण , पदम् विभूषण आदि।

  2. कोई भी भारतीय नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि , भेंट , उपलब्धि राष्ट्रपति की अनुमति के बिना स्वीकार नहीं करेगा।


क्रीमीलेयर (Creamy Layer)

इस व्यवस्था के अंतर्गत वें  छात्र जो क्रीमीलेयर के अंतर्गत आते है जिन्हें इस आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा ।

  • संवैधानिक पद धारण करने वाले व्यक्ति जैसे – राष्ट्रपति , उपराष्ट्रपति , उच्चतम व उच्च न्यायालयों के न्यायधीश , संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष, मुख्य निर्वाचन आयुक्त आदि ।

  • Group-A , Group-B के अंतर्गत आने वाले केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी और निजी संस्थाओ में कार्यरत अधिकारी।

  • सेना (थल , वायु , नौसेना , अर्द्धसैनिक) में कर्नल या उससे ऊपर रैंक का अधिकारी।

  • वर्तमान में  8 लाख रुपये से अधिक सालाना तक की आय वाले व्यक्ति।

5 Comments

  1. E.FERET
    1# Right to Equility
    2# Right to Fridome
    3# Right to Agenst Exploitation
    4# Right to Religion
    5# Right to Education
    6# Right to Tritment

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