Renaissance in Europe

यूरोप में पुनर्जागरण (Renaissance in Europe)

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Renaissance in Europe

पुनर्जागरण का शाब्दिक अर्थ होता है पुन:जागना। पुनर्जागरण के कारन यूरोप में  कला, साहित्य, राजनीति, समाज,अर्थव्यवस्था, धर्म में एक नई प्रकार की सोच या मनोदशा का विकास हुआ।

पुनर्जागरण के कारण:

धर्मयुद्ध: पश्चिमी यूरोपीय राष्ट्र एवं अरबों के बीच जेरूसलम पर अधिकार को लेकर युद्ध हुए। इन युद्धों के कारण यूरोपीय श्रेष्ठता या धार्मिक श्रेष्ठता की धारणा खण्डित हुई। अरबों के जीवन स्तर ने यूरोपियों को प्रभावित किया। अरबों के सम्पर्क के कारण इनमें नवीन चेतना का विकास हुआ।

1453 ईस्वी में ऑटोमन साम्राज्य (तुर्को) ने कस्तुन्तुनिया पर नियन्त्रण स्थापित कर लिया। यह पूर्वी रोमन साम्राज्य की राजधानी, प्रमुख नगर एवं शिक्षा का केन्द्र था। इस कारण बडी संख्या में यहाँ के विद्वानों ने इटली एवं पश्चिमी यूरोपीय राष्ट्र में शरण ली। इन विद्वानों ने पश्चिमी यूरोप में मानववादी एवं आधुनिक विचारों का प्रसार किया।

15वीं सदी के मध्य में गुटेनबर्ग (जर्मनी) ने छापेखाने का आविष्कार किया इसके साथ ही पुस्तकों की उपलब्धता सुलभ हुई एवं नवीन विचारों का प्रवाह यूरोपीय समाज में फैलने लगा।

1453 ई.  की घटना के कारण एशिया-यूरोप का स्थल मार्ग अवरुद्ध हो गया और भौगोलिक खोजे प्रारम्भ हुई जिसके कारण नवीन विचारों का उदय हुआ।

पुनर्जागरण इटली में प्रारम्भ होने के कारण

  • इटली आरम्भ से ही ग्रीको-रोमन (Greek – Roman) सभ्यता का केन्द्र था।
  • रोम (वैटिकन सिटी) ईसाई धर्म का केन्द्र इटली में होना।
  • भूमध्य सागर में इटली की अवस्थिति ने उसे व्यापारिक केन्द्र बना दिया। एशिया, अफ्रीका को जाने वाले मार्ग यहीं से निकलते थे।
  • इटली की व्यापारिक उन्नति के कारण यहां कई व्यापारिक परिवार समृद्ध हुए और उन्होंने आधुनिक विचारकों, लेखकों, नाविकों को प्रोत्साहन दिया।

पुनर्जागरण का प्रभाव : 

अर्थव्यवस्था पर : पुनर्जागरण के कारण नवीन वैकल्पिक जलमार्गों की खोज हुई, कोलम्बस ने अमेरिका की खोज की, तथा पुर्तगाली वास्कोडिगामा ने 1498 में भारत की खोज की। इन नवीन खोजों से वैश्विक समुद्री व्यापार के युग की शुरुआत हुई।

धर्म पर : पुनर्जागरण के कारण स्वतन्त्र चिंतन का विकास हुआ जिसमें धार्मिक मान्यताओं को चुनौती दी गई। तार्किक दृष्टिकोण का विकास हुआ एवं व्यक्ति चर्च के प्रभाव से मुक्त होने लगी।

राजनीति पर प्रभाव : पुनर्जागरण के कारण क्षेत्रीय साहित्य का विकास हुआ और क्षेत्रीय भाषाओं के आधार पर लोगों ने संगठित होकर राष्ट्र राज्यों का निर्माण किया एवं पोप की सत्ता को अस्वीकार कर दिया। व्यापारिक समृद्धि ने शासकों एवं व्यापारियों को नजदीक लाने की भूमिका निभाई क्योकि चर्च से राजा एवं व्यापारी दोनों परेशान थे राजाओं को स्वायत्तता नहीं थी और चर्च ब्याज के कारोबार एवं सामुदायिक व्यापार के विरोध में था।

समाज पर प्रभाव : पुनर्जागरण के कारण मनुष्य के चिन्तन का केन्द्र बिन्दु भगवान के स्थान पर मनुष्य स्वयं हो गया। व्यक्ति का जीवन सुखमय होना चाहिए जैसे विचार लोकप्रिय होने लगे। पैट्रार्क  को प्रथम मानववादी कवि कहते हैं। पुनर्जागरण के कारण मनुष्य को लुभाने वाली चीजों का विकास हुआ जैसे कला,संगीत, इत्यादि। इन परिवर्तनों ने मध्यम वर्ग के उदय एवं विकास का आधार तैयार किया और मध्यमवर्ग ने पुनर्जागरण चेतना को आगे ले जाने का कार्य किया।

पुनर्जागरण के कारण साहित्य पर निम्न प्रभाव पड़ा :

  • साहित्य में मानववादी चेतना का विकास हुआ।
  • स्थानीय भाषाओं का विकास हुआ।
  • भाषा विज्ञान का अध्ययन विकसित हुआ। जैसे –
    • दाँते (इटली) : Divine Comedy” लिखी (13 सदी में पुनर्जागरण की प्रथम रचना), अन्य रचना – New Life |
    • मैकीयावली (टली) : “The Prince”, The Monarch
    • पैट्रार्क (इटली) : अफ्रीका पर लम्बा नामक गीत लिखा।
    • टामसमूर (अंग्रेज) : यूटोपिया” लिखी जिसमें आदर्श राज्य व समाज की कल्पना की गई है। लैटिन भाषा में लिखी गई।
    • विलियम शेक्सपीयर (अंग्रेज) : 16वीं सदी में प्रमुख नाटककार एवं कवि। प्रमुख रचना : हेमलेट, मैकबेथा
    • इरेस्मस (इच) : In the Praise of folly (मूर्खता की प्रंशसा पर) यह विश्व की सर्वाधिक बिकने वाली प्रथम पुस्तक थी।
    • मार्टिन लूथर (जर्मन) : 16वीं सदी में  31 थिसेस (Thesis) लिखी। बाइबल का जर्मन भाषा में अनुवाद

कला पर प्रभाव:

पुनर्जागरण से पूर्व कला पर धर्म प्रभावी था तथा कला का उद्देश्य धर्म प्रसार था एवं कला काल्पनिक थी, लेकिन पुनर्जागरण काल में मनुष्य केन्द्र बिन्दु रहा, मनुष्य के मनोरंजन हेतु कला अस्तित्व में आयी, प्राकृतिक सौन्दर्य प्रमुखता से रहा।।

स्थापत्य :

मध्ययुगीन गोथिक कला के स्थान पर ग्रीको रोमन कला का विकास हुआ इसे शास्त्रीय शैली भी कहा जाता है।

ग्रीको रोमन शैली की विशेषताएँ : 

  • नुकीले मेहराब की जगह गोल मेहराब
  • शृंगार, योजना
  • लकड़ी का प्रयोग
  • खिड़कियों में महत्त्व में वृद्धि

माइकल एंजेलो : रेनेसा स्थापत्य का प्रमुख व्यक्ति, इसे रेनेसा मैन भी कहते हैं क्योंकि यह व्यक्ति स्थापत्यकार के साथ-साथ चिक्कार एवं मूर्तिकार भी था। प्रमुख चित्र – Genesis, The Last Judgement

चित्रकला : 

  • जियोटो: प्राकृतिक सौन्दर्य व जनसाधारण से सम्बन्धित चित्र बनाये। केनवास  पर चित्र बनाने वाले  प्रथम व्यक्ति।
  • लियोनार्दो द विंची : मोनालिसा
  • राफेल : सिस्टाइन मेडिना

मूर्तिकला : 

  • दोनेतेल्लो: प्रथम मूर्तिकार 1. सेन्ट जार्ज, 2, इरेज्मोदा (कांसे) की प्रमुख मूर्तियाँ
  • माइकल एंजेलो: लगभग 400 मूर्तियाँ बनाई David. Pictan, Moses की मूर्तियाँ प्रमुख।
  • संगीत : पोप ने संगीत पर रोक लगा रखी थी लेकिन पुनर्जागरण के कारण संगीत का पुनः विकास हुआ।
  • पेलेस्ट्रीना: प्रसिद्ध संगीतकार, Massesनामक संगीत बनाया जो आगे चलकर चर्च के संगीत का आधार बना, 1594 में ओपेरा अस्तित्व में आया।
  • विलियम बर्ड: आर्केस्ट्रा (Orchestra) का निर्माता।

विज्ञान पर प्रभाव : 

पुनर्जागरण के कारण तर्क एवं अनुसंधान पर जो दिया गया जो धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध थी। जैसे –

  • कापर निक्स: इन्होंने पृथ्वी केन्द्रित ब्रह्माण्ड के स्थान पर सूर्य केन्द्रित ब्रह्माण्ड का सिद्धान्त दिया।
  • केपलर : इन्होंने ग्रहों की गति के नियम दिये और परिभ्रमण पथ दीर्घवृत्ताकार बताया।
  • ब्रूनो : कापरनिक्स के सिद्धान्त का समर्थक, पोप ने जिंदा जलवा दिया।
  • गैलीलीयो : इटली का खगोलशास्त्री, दूरबीन का आविष्कार किया।
  •  न्यूटन : गुरुत्वाकर्षण एवं गति के नियम दिये।

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