मुर्गियों की नस्लें

मुर्गियों की नस्लें (Poultry Breeds)

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  • उम्र सीमा: 5 – 10 साल
  • वैज्ञानिक नाम: गैलस डोमेस्टिकस (Gallus domesticus)

भारत में सर्वाधिक कुक्कुट पालन क्रमश: आंध्र प्रदेशतमिलनाडु में किया जाता है।

लेगहार्न नस्ल की मुर्गी विश्व में सबसे अधिक अंडे (eggs) देने के लिए प्रसिद्ध है।

मुर्गी की कार्निस तथा न्यू हैम्पशायर नस्ल विश्व में उच्च गुणवत्ता का मांस देने के लिए प्रसिद्ध है।

कुक्कुट पालन को विकसित रूप प्रदान करने के लिए वर्ष 1997 में उत्तर प्रदेश में केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर (बरेली) की स्थापना की गयी थी।

मुर्गी के अंडे का बाहरी कवच कैल्शियम कार्बोनेट (calcium carbonate) का बना होता है।

भारत में मुर्गियों की नस्लों को मुख्यत: दो भागों में विभाजित किया जा सकता है।

उत्पत्ति के आधार पर

  • भूमध्य सागरीय नस्लें (Mediterranean Sea Breeds) – एंकोना (स्पेन), मिनोर्का (स्पेन), लेगहार्न (इटली) आदि।
  • अमेरिकी नस्लें (American breeds) – रोड आयरलैंड, न्यू हैम्पशायर, प्लीमाथ आदि।
  • एशियाई नस्लें – कड़कनाथ, ब्रह्मा, घाघस, कोचीन, असील, बसरा, लेग्शान (चीनी नस्ल) आदि।

उपयोगिता के आधार पर मुर्गियों की नस्लें 

  • अंडा उत्पादन – लेगहार्न, मिनोर्का
  • मांस उत्पादन – कोचीन, सुसेक्स औप्रिगटन, कार्निस, न्यू हैम्पशायर आदि।
  • द्विकाजी नस्लें – रोड आयरलैंड, प्लीमाथ, रेड आस्ट्रोलार्म आदि।
  • मनोरंजक नस्लें – असील (इस मुर्गी का उपयोग मुख्यत: लड़ाई हेतु किया जाता है)

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