संसदीय प्रस्ताव, Parliamentary Motion

संसदीय प्रस्ताव (Parliamentary Motion)

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Parliamentary Motion


संसदीय प्रस्ताव क्या है (What is parliamentary motion):

संसदीय प्रस्ताव, संसद के सदस्यों के बोलने तथा अपनी बात कहने का एक माध्यम है। संसद सदस्य लोक हित से जुड़े मामलों को इन प्रस्तावों के माध्यम से ही संसद में उठाते हैं। संसद सदस्यों द्वारा संसद में रखे जाने वाले प्रस्तावो की सूची निम्नलिखित है –

1. कार्य स्थगन प्रस्तान (Work Adjournment Motions):

जब कोई विशेष घटना घटित हो जाय या देश में कोई विशेष स्थिति उत्पन्न हो जाए, तो संसद सदस्य, अध्यक्ष की अनुमति से यह प्रस्ताव कर सकते हैं कि सदन की वर्तमान कार्यवाही को स्थगित कर इस विशेष घटना, स्थिति या प्रश्न पर विचार किया जाना चाहिए। इसे ही ‘कार्य स्थगन प्रस्ताव’ या ‘काम रोको प्रस्ताव’ कहते हैं। प्रश्न काल की समाप्ति के बाद यह प्रस्ताव पेश किया जाता है।

  • कार्य स्थगन प्रस्ताव (adjournment motions) कम-से-कम 50 सदस्यों द्वारा समर्थित होना चाहिए।
  • स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा प्रारम्भ हो जाने के बाद अध्यक्ष सभा को तब तक स्थगित नहीं कर सकता जब-तक कि प्रस्ताव का निपटारा न हो जाय।
  • स्थगन प्रस्ताव स्वीकृत हो जाने के बाद सभा स्वतः स्थगित हो जाती है।

2. ध्यानाकर्षण प्रस्ताव (Call Attention Motion):

अध्यक्ष की अनुमति से जब कोई संसद सदस्य किसी मंत्री का ध्यान सार्वजनिक हित की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण विषय की ओर आकर्षित करता है या उससे सम्बन्धित प्रश्न पूछता है, तो उसे ध्यानाकर्षण प्रस्ताव कहते हैं।

3. विशेषाधिकार प्रस्ताव (Privilege Motion):

यदि किसी मंत्री ने तथ्यों को छिपाकर या गलत जानकारी देकर संसद सदस्यों के विशेषाधिकार का हनन किया है तो संसद सदस्य मंत्री के विरुद्ध ‘विशेषाधिकार प्रस्ताव’ रख सकते हैं।

4. निन्दा प्रस्ताव (Censure Motion):

सरकार की नीतियों की आलोचना करने के लिए विपक्षी दल के सदस्यों द्वारा किसी मंत्री विशेष या शासन के विरुद्ध निन्दा प्रस्ताव रखा जाता है। निन्दा प्रस्ताव के पारित हो जाने पर सरकार को त्याग-पत्र देना पड़ता है।

5. कटौती प्रस्ताव (Cut Motions):

बजट की माँगों में कटौती हेतु रखे गए प्रस्ताव को ‘कटौती प्रस्ताव’ कहते हैं। लोकसभा में कटौती प्रस्ताव पारित होने का मतलब होता है ‘सरकार के प्रति अविश्वास’; अतः कटौती प्रस्ताव पास हो जाने पर सरकार को त्याग पत्र देना पड़ता है। कटौती प्रस्ताव को स्वीकृति देना पीठासीन अधिकारी के विवेक पर निर्भर होता है। कटौती प्रस्ताव निम्न तीन प्रकार का होता हैं-

  • नीतिगत कटौती (Disaprroval of Policy Cut): यह प्रस्ताव किसी विशेष मांग के तहत् आने वाली किसी नीति को अस्वीकृत करने के लिए लाया जाता है। इसके द्वारा मांग की गई राशि में से 1 रु. की कटौती का प्रस्ताव रखा जाता है। इस प्रस्ताव को प्रस्तुत करते समय सदस्य को यह बताना पड़ता है कि वह किस नीति में कटौती करना चाहता है।
  • अर्थगत कटौती (Economic Cut): यह प्रस्ताव किसी विशिष्ट मद के लिए मांगी गयी राशि में कमी करने के लिए लाया जाता है। इसका मूल उद्देश्य खर्च में कमी लाना होता है।
  • प्रतीक कटौती (Token Cut): यह प्रस्ताव सरकार के उत्तरदायित्व से सम्बन्धित किसी विशेष विषय के सम्बन्ध में विरोध प्रकट करने के लिए लाया जाता है। सामान्यतया इस प्रस्ताव में 100 रु. की कटौती की जाती है।

6. अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion):

भारत के संविधान में अविश्वास, प्रस्ताव का उल्लेख नहीं है। संविधान के अनु0 118 के तहत संसद के प्रत्येक सदन को यह शक्ति दी गयी है कि वह अपनी प्रक्रिया और अपने कार्य-संचालन के विनियमन के लिए नियम बना सकेगा। अतः लोक सभा ने अपने नियम-198 के तहत मंत्रियों के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया के लिए नियम बनाया है। अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा की कार्यवाही के साथ ही जुड़ा हुआ है। इसे लोकसभा में विपक्षी दल या विपक्षी दलों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।

लोकसभा के कम से कम 50 सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का अनुसर्मथन आवश्यक है (UP Lower : 2015)। इसे प्रस्तुत करने के लिए कोई विशेष कारण या आधार बताना आवश्यक नहीं है। इस प्रस्ताव के द्वारा मंत्रिपरिषद में अविश्वास प्रकट किया जाता है और यदि यह प्रस्ताव पारित हो जाता है तो मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है।

अब-तक लोकसभा में कुल 27 बार अविश्वास प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें से 26 बार प्रस्ताव पास नहीं हो सका, तथा एक बार 1978 में प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई ने प्रस्ताव पास होने के पूर्व त्यागपत्र दे दिया था।

7. विश्वास प्रस्ताव ( Motion of Confidence):

विश्वास प्रस्ताव प्रधानमंत्री अथवा मंत्रिपरिषद के किसी सदस्य द्वारा लाया जाता है  जब राष्ट्रपति को इस बात का संदेह होता है कि प्रधानमंत्री को लोकसभा में बहुमत प्राप्त नहीं है तो वह उससे विश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कहता है। अतः इसका उद्देश्य यह साबित करना होता है कि प्रधानमंत्री को लोकसभा का बहुमत प्राप्त है। यदि सदन में विश्वास प्रस्ताव पास नहीं होता है तो प्रधानमंत्री को त्यागपत्र देना पड़ता है।

सर्वप्रथम 1979 में चौधरी चरण सिंह को सदन में विश्वास मत हासिल करने को कहा गया था। उन्होंने विश्वास प्रस्ताव पर विचार होने के पूर्व ही अपना त्यागपत्र दे दिया था।

8. धन्यवाद प्रस्ताव (Motion of Thanks):

संसदीय शासन प्रणाली में प्रत्येक वर्ष प्रथम सत्र के आरम्भ में तथा प्रत्येक आम चुनाव के पश्चात जब नई सरकार का गठन होता है तब प्रथम सत्र के आरम्भ में राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को एक साथ सम्बोधित करता है, जिसमें वह सरकार नीतियों और कार्यक्रमों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करता है। इसे राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण कहा जाता है।

अभिभाषण के पश्चात राष्ट्रपति को धन्यवाद ज्ञापित करने के लिए सरकार द्वारा संसद के प्रत्येक सदन में धन्यवाद प्रस्ताव लाया जाता है। प्रस्ताव के पारित होने पर यह माना जाता है कि सरकार की नीतियों को सदन का विश्वास प्राप्त है। किन्तु यदि लोकसभा प्रस्ताव को अस्वीकृत कर देती है तो सरकार को त्याग पत्र देना पड़ता है।

9. मूल प्रस्ताव (Substantive Motion):

मूल प्रस्ताव एक ऐसा प्रस्ताव होता है जो अपने-आप में पूर्ण होता है। इसे इस प्रकार तैयार किया जाता है कि उससे सदन के फैसले की अभिव्यक्ति हो सके। अधोलिखित प्रस्ताव मूल प्रस्ताव हैं।

  • राष्ट्रपति के अभिभाषाण पर धन्यवाद प्रस्ताव
  • अविश्वास प्रस्ताव
  • विशेषाधिकार प्रस्ताव
  • लोकसभा के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष अथवा राज्य सभा के उपाध्यक्ष को निर्वाचित करने या हटाने के लिए प्रस्ताव

 

 

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