Muhammad Ghori

मुहम्मद गौरी (1173-1206)

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11वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध एवं 12वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में भारत में तुर्कों ने आक्रमण किया| भारत में तुर्की आक्रमण के नेतृत्वकर्ता महमूद ग़ज़नवी  (971-1030) और मुहम्मद गौरी थे|

मुहम्मद गौरी

मुहम्मद गौरी , ग़ज़नवी साम्राज्य के अधीन गौर नामक राज्य का शासक था, जो एक अफगान योद्धा था| मुहम्मद गौरी 1173 ई. में गौर का शासक बना| इस समय मथुरा  के उत्तर-पश्चिम में पृथ्वीराज और दक्षिण-पूर्व में जयचंद्र जैसे  शक्तिशाली शासकों के राज्य थे| इसी समय भारत के पश्चिम-उत्तर के सीमांत पर शाहबुद्दीन मुहम्मद गौरी (1173 ई.-1206 ई.)  ने महमूद ग़ज़नवी के वंशजों को पराजित कर  एक नए तुर्की राज्य की स्थापना की |


मुहम्मद गौरी के आक्रमण

  • गौरी ने भारत पर पहला आक्रमण 1175 ई. में मुल्तान पर किया|
  • दूसरा आक्रमण 1178 ई. में गुजरात पर किया|
  • इसके बाद उसने 1179 ई. में पेशावर  तथा 1185 ई. में स्यालकोट अपने कब्जे में ले लिया|
  • 1191 ई. में तराइन के प्रथम युद्ध मुहम्मद गौरी व पृथ्वीराज चौहान से हुआ, जिसमें मुहम्मद गौरी को बुरी तरह पराजित हुआ, किन्तु भागने में सफल रहा, समर्पण कर चुकी पराजित सेना को पृथ्वीराज चौहान ने उसे छोड़ दिया|
  • इसके बाद मुहम्मद गौरी ने अधिक ताकत के साथ पृथ्वीराज चौहान पर 1192 ई में पुन: आक्रमण कर दिया। तराइन का यह द्वितीय युद्ध 1192 ई. में हुआ।  इस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की  हार हो गई और उनको बंधक बना लिया गया|
  • इसके बाद गौरी ने कन्नौज के राजा जयचंद को हराया जिसे चंदावर का युद्ध कहा जाता है|
  • 1194 ई. के बाद गौरी के द्वारा नियुक्त दो सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक तथा बख्तियार खिलजी ने भारतीय क्षेत्रों को विजित करना प्रारंभ किया|

बख्तियार खिलजी ने बिहार तथा बंगाल का पश्चिमी क्षेत्र के शासक लक्ष्मणसेन को पराजित किया और इसी समय उसने नालंदा विश्व विद्यालय , विक्रमशिला (बंगाल) एवं ओदंतीपुर (बंगाल) विश्व विद्यालय को नष्ट कर दिया| इसके उपरांतबख्तियार खिलजी ने असम पर आक्रमण किया किन्तु असम के माघ शासक से पराजित हुआ |

इन युद्धों में विजय के बाद गौरी वापस अफगान आ गया, तथा अपने कुतुबुद्दीन ऐबक को भारतीय क्षेत्रों का प्रशासक घोषित कर दिया | कुतुबुद्दीन ऐबक उसके सबसे योग्य दासों में से एक था जिसने दिल्ली सल्तनत की नींव रखी थी|

मुहम्मद गौरी की मृत्यु

मुहम्मद गौरी ने 1206 ई.में पंजाब के खोखर जनजाति के विद्रोह को दबाने के लिये भारत पर अंतिम आक्रमण किया तथा इसी अभियान के दौरान दमयक (पश्चिमि पाकिस्तान) में जब वह सिंधु नदी के किनारे नमाज पढ रहा था तब किसी व्यक्ति ने गौरी की हत्या कर दी गई|

मुहम्मद गौरी ने लक्ष्मी की आकृति वाले कुछ सिक्के चलाये थे|

गौरी की मृत्यु के बाद उसके प्रमुख दासों ने उसके साम्राज्य का आपस में विभाजन कर लिया |

  1. कुतुबुद्दीन ऐबक – भारतीय क्षेत्र। ऐबक ने दिल्ली को इस्लामी साम्राज्य का केन्द्र बनाया।
  2. ताजुद्दीन यल्दोज  – गजनी क्षेत्र।
  3. नासीरुद्दीन कुबाचा – उच्च तथा सिंध (पाकिस्तान)।

NOTE :

चंदबरदाई के अनुसार युद्ध में पराजय के बाद पृथ्वीराज तृतीय को बंदी बनाकर गजनी ले जाया गया, तथा पृथ्वीराज ने   शब्दभेदी बाण से  मुहम्मद गौरी की हत्या कर दी |

हसम निजामी के अनुसार  युद्ध में पराजित होने के बाद पृथ्वीराज ने अधीनता स्वीकार कर ली किंतु गौरी के विरुद्ध विद्रोह करने पर पृथ्वीराज चौहान की हत्या कर दी गयी   (जिसकी पुष्टि अजमेर से प्राप्त सिक्कों से होती है जिसमें एक तरफ घोङे की आकृति तथा मुहम्मद – बिन – साम लिखा है, तथा दूसरी तरफ बैल की आकृति बनी है एवं पृथ्वीराज लिखा हुआ है|

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