states of matter

द्रव्य एवं उसके भौतिक गुण (Matter & its physical properties)

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वह कोई भी वस्तु, जिसका द्रव्यमान होता है और स्थान घेरती है, द्रव्य (Matter) कहलाती है। हमारे आसपास की सभी वस्तुएँ द्रव्य द्वारा बनी होती हैं। जैसे – पुस्तक, कलम, पेन्सिल, जल, वायु आदि सभी जीव द्रव्य से बने होते हैं।

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द्रव्य के भौतिक गुण (Physical properties of matter)

स्थान घेरना – सभी पदार्थ (matter) स्थान घेरते हैं, वायु भी एक द्रव्य ((matter)) है, और भले ही वह दिखाई नहीं देता पर वह स्थान घेरता है, जब किसी नई वस्तु को वायु में रखा जाता है, तो वह पदार्थ (matter) उस क्षेत्र की वायु को विस्थापित कर उसका स्थान ग्रहण कर लेती है।

भार (Weight) – किसी भी वस्तु का भार (Weight) पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल (gravitational force) पर भी निर्भर करता है, भार की इकाई ग्राम (gram) या किलोग्राम (kilogram) होती है।

विभाज्य होना (Divisible) – किसी भी पदार्थ को उसकी सबसे छोटी ईकाई के स्तर ( परमाणु) तक विभाजित किया जा सकता है। परमाणु (Atom) भी कई छोटी इकाईयों से मिलकर बना होता है जिन्हें इलेक्ट्रान (electrons), प्रोट्रॉन (protons) और न्यूट्रॉन (neutrons) कहा जाता है।

जड़त्व (Inertia) – कोई भी पदार्थ या द्रव्य (matter) अपनी समरूप स्थिति में ही बने रहना चाहता है, तथा वह अपनी स्थिति में किए जाने वाले परिवर्तन का विरोध करता है। पदार्थ के इस गुण को भौतिकी विज्ञान (physics) में जड़त्व (Inertia) कहा जाता है। किसी भी वस्तु का जड़त्व (Inertia) उसके भार (Mass) पर निर्भर करता है, अर्थात् जिस वस्तु का भार (Mass) जितना अधिक होगा उस वस्तु का जड़त्व (Inertia) उतना ही अधिक होगा, और उसकी गति एवं दिशा में परिवर्तन के लिए उतना ही अधिक बल (Force) का प्रयोग करना होगा।

संपीड्यता (Compressibility) – द्रव्यों (matters) का एक प्रमुख गुण उनकी संपीडित (compressed) होने की इनकी क्षमता  है। सभी द्रव्यों (matters) में संपीडित होने की क्षमता अलग-अलग होती है। ठोस द्रव्यों (solids matter) में संपीडन गैस (gas) एवं द्रवों (liquids) की अपेक्षा कम होता है, जबकि सर्वाधिक संपीडन गैस द्रव्यों में होता है। जिस द्रव्य (matter) के अणुओं के मध्य रिक्त स्थान जितना अधिक होगा उस द्रव्य (matter) की संपीड्यता (Compressibility) भी उतनी अधिक होगी।

Note: पत्थर को अत्यधिक गर्म किए जाने पर यह टूट कर उड़ने लगता है, क्योंकि पत्थर कई विभिन्न प्रकार के पदार्थों से मिलकर बना होता है तथा ताप ग्रहण कर इसके संघटकों में अनियमित प्रसार के कारण पत्थर टूटने लगता है।

सरंध्रता (Porosity) – धातुओं (metals) में रन्ध्रों (pores) की संख्या एवं आकार अधातुओं (non-metals) तथा द्रवों (fluids) एवं गैसों (gases) की तुलना में कम होता है। यह रन्ध्र  (pores) भी द्रव्यों (matter) के अणुओं के मध्य रिक्त स्थान के कारण निर्मित होते हैं।

प्रत्यास्थता (Elasticity) – द्रव्यों (matters) का वह गुण जिसके कारण वह अपने ऊपर आरोपित बल के हट जाने के पश्चात पुनः अपनी प्रारंभिक अवस्था में लौट आता हैं उस पदार्थ की प्रत्यास्थता (Elasticity) कहलाती है। गैसों और द्रवों में  प्रत्यास्थता (Elasticity)का गुण ठोस पदार्थों की अपेक्षा अधिक होता है।

संसक्ति (Cohesion) – किसी पदार्थ का वह गुण जिसके कारण उसके अणु आपस में जुड़े रहते हैं, सांसक्तिक बल (Cohesion force) कहलाता है। ठोस पदार्थों में सांसक्तिक बल (Cohesion force) द्रवों एवं गैसों की अपेक्षा अधिक होता हैं।  गैसों में सांसक्तिक बल (Cohesion force) न्यूनतम होता है इसलिए गैस के अणु दूर-दूर स्थित होते हैं।

उदाहरण – पानी की छोटी बूंदों का आपस में मिलकर बड़ी बूंद बनाना

आसंजन (Adhesion) – दो भिन्न-भिन्न पदार्थों के अणुओं के मध्य आकर्षण बल को आसंजन (Adhesion) कहा जाता है। उदाहरण – पानी की बूंदों का बर्तन की सतह पर चिपकना

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