शहीद दिवस (Martyrs’ Day)

शहीद दिवस (Martyrs’ Day)

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प्रत्येक वर्ष 23 मार्च को भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु को श्रद्धांजलि देने के लिए शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।

  • इस दिन को शहीद दिवस या सर्वोदय दिवस के रूप में भी जाना जाता है।
  • यह दिन 30 जनवरी को मनाए गए शहीद दिवस के साथ भ्रमित नहीं होना चाहिए, जिस दिन महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी।

प्रमुख बिंदु

भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु का निधन 23 मार्च 1931 को हुआ था।

1928 में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या करने के लिए उन्हें फांसी पर लटका दिया गया था। उन्होंने उन्हें ब्रिटिश पुलिस अधीक्षक जेम्स स्कॉट समझकर गोली मरी थी। वह जेम्स स्कॉट था जिसने लाठीचार्ज का आदेश दिया था, जिसके कारण अंततः लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई थी।

उनके जीवन ने अनगिनत युवाओं को राष्ट्रीय आंदोलन के लिए  प्रेरित किया और उनकी मृत्यु ने मिसाल कायम की।

भगत सिंह (Bhagat Singh)

भगत सिंह का जन्म 26 सितंबर, 1907 में हुआ, उनके बचपन का नाम भागनवाला था। भगत सिंह का पालन पोषण पंजाब के जुल्लुंदुर दोआब जिले में संधू जाटों के परिवार बुर्जुआ में हुआ था।

उस समय भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन दो विभिन्न विचारधाराओं में विभाजित था –

  • लाल-बाल-पाल की ‘अतिवादी’ विचारधारा
  • महात्मा गांधी की अहिंसक विचारधारा

1923 में, भगत सिंह ने नेशनल कॉलेज (लाहौर) में प्रवेश लिया, जिसकी स्थापना और प्रबंधन लाला लाजपत राय और भाई परमानंद ने किया था।

  • नेशनल कॉलेज (लाहौर) की स्थापना सरकार द्वारा चलाए जा रहे संस्थानों के विकल्प के रूप में की गयी थी, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में स्वदेशी विचारधारा को प्रोत्साहित किया जा सके।

वर्ष 1924 में भगत सिंह ने कानपुर में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (Hindustan Republican Association) की सदस्यता ग्रहण की, जिसकी स्थापना एक वर्ष पूर्व सचिंद्रनाथ सान्याल ने की थी। एसोसिएशन के मुख्य आयोजक चन्द्रशेखर आजाद थे और भगत सिंह उनके बहुत करीबी थे।

  • इन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद से लड़ने के लिए सशस्त्र क्रांति को एकमात्र हथियार माना था।

1925 में, भगत सिंह लाहौर लौट आए और अगले वर्ष उन्होंने और उनके सहयोगियों ने नौजवान भारत सभा (Naujawan Bharat Sabha) नामक एक क्रांतिकारी युवा संगठन की शुरुआत की थी।

अप्रैल 1926 में, भगत सिंह ने सोहन सिंह जोश के साथ संपर्क स्थापित किया और उनके माध्यम से ‘कार्यकर्ता एवं किसान पार्टी (Workers and Peasants Party)’ की स्थापना की, जिसने पंजाबी में मासिक पत्रिका कीर्ति का प्रकाशन शुरू किया।

  • अगले वर्ष, भगत सिंह ने सोहन सिंह जोश के साथ कार्य किया और मासिक पत्रिका कीर्ति के संपादकीय बोर्ड में शामिल हो गए।

वर्ष 1927 में, उन्हें पहली बार छद्म नाम विद्रोही के तहत लिखे गए लेख के लिए काकोरी केस के आरोपियों के साथ गिरफ्तार किया गया था। भगत सिंह पर दशहरा मेले के दौरान लाहौर में एक बम विस्फोट के लिए जिम्मेदार होने का भी आरोप लगाया गया था।

1928 में, भगत सिंह ने हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन का नाम बदलकर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन (HSRA) कर दिया। 1930 में, जब चंद्रशेखर आजाद को गोली की मृत्यु के बाद हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन (HSRA) भी समाप्त हो गया।

  • नौजवान भारत सभा (Naujawan Bharat Sabha) ने पंजाब में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन (HSRA) की जगह ली।

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