हिमाचल प्रदेश की प्रमुख नदियाँ (Major Rivers of Himachal Pradesh)

40 mins read

हिमाचल प्रदेश में मुख्य रूप से पाँच नदी प्रवाहित होती है, जिन्हें प्रमुख रूप से दो जल अपवाह तंत्र में बाटा गया है –

  1. सिन्धु नदी अपवाह तंत्र (Indus river system)
    • सतलुज
    • व्यास
    • रावी
    • चिनाब
  2. गंगा नदी अपवाह तंत्र (Ganga river system)

    • यमुना

सिन्धु नदी अपवाह तंत्र:

हिमाचल प्रदेश की अधिकतर नदियां सिन्ध नदी अपवाह तंत्र की है, जिनमें सतलुज, व्यास, रावी, और चिनाव प्रमुख हैं। ये नदियां सिन्धु घाटी में मिलकर आगे प्रवाहित होती हुई अरब सागर में गिरती है

1. सतलुज नदी (Satluj River):

सतलुज नदी को वेदों में शुतुद्रि तथा संस्कृत में शतद् के नाम से वर्णित किया गया है। सतलुज के अन्य नाम मुकसंग, सम्पू, जुगटी, सुमुद्रग, सुतूद्रा आदि हैं। सतलुज नदी कैलाश पर्वत के दक्षिण में मानसरोवर के मानतलाई झील (तिब्बत) से निकलती है। यह नदी अपनी उद्गम स्थान से लगभग 400 कि.मी. की दूरी तय करने के बाद जासकर और वृहत हिमालय को काटती हुई शिपकी दरें के पास हिमाचल प्रदेश में प्रवेश करती है।

सतलुज नदी किन्नौर जिले को दो भागों में बांटने के बाद लगभग 130 किलोमीटर बहने  के बाद  बदला (ज्यूरी) नामक स्थान पर शिमला जिले में प्रवेश करती है। सतलुज नदी हुईधार (मण्डी) तथा कसाली (बिलासपुर) जिले में प्रवेश करती हैं। यह नदी ऊना के समीप हिमाचल को छोड़ कर नंगल पंजाब में बहती है।

सतलुज की सहायक नदियाँ (Tributaries of Satluj):

किन्नौर जिले में सतलुज के दाईं और से  स्पीति, पेजर (तेती), काशंग मुलगून, वांगर, शोरंग और रूपी तथा सतलुज  के बाई ओर तिरंग, ज्ञानथिंग, बास्पा, आदि सतलुज  की सहायक नदी है। किन्नौर जिले में सतलुज की सबसे बड़ी सहायक नदी स्पीति है, जो की नामगीया नामक स्थान पर इसमें मिल जाती है।

सतलुज नदी के मुख्य तथ्य:

  • वैदिक नाम – शुतुद्रि
  • उद्गम स्थल – राक्सताल झील (तिब्बत)
  • तिब्बत में जानी जाती है – लेनगजेग जैनगपो (ElephantRiver)
  • जल अधिग्रहण क्षेत्र – 20,398 वर्ग कि.मी
  • कुल लम्बाई – 1488 कि.मी (प्रदेश कि सबसे लम्बी नदी)
  • यह नदी खूनी नदी के रूप में भी जानी जाती है।
  • एशिया का सबसे ऊँचा बांध ( भाखड़ा ) बनाया गया है। 
  • भाखड़ा बांध बनाने से प्रदेश सी सबसे बड़ी कृत्रिम झील, गोविन्द सागर झील बनी है।
  • 1964 में इस नदी पर एशिया का सबसे ऊँचा पुल कन्द्रौर नामक स्थान पर बनाया गया है, इस पुल कि लम्बाई 280 मीटर व ऊंचाई 80 मीटर और 7 मीटर चौड़ा है।
  • इसके किनारे तत्तापानी में गर्म पानी के चश्में स्थित है।

2. व्यास नदी (Vyaas river):

व्यास नदी वेदों में आर्जीकीया और संस्कत में विपाशा के नाम ये वर्णित है। यह नदी पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला से रोहतांग के समीप सिकंड में निकलती है। व्यास नदी के दो स्रोत है व्यास ऋषि और व्यास कुंड।

व्यास नदी का जल ग्रहण क्षेत्र लगभग 13,663 वर्ग कि.मी. है। इस नदी की कल लम्बाई 460 कि.मी. है जबकि हिमाचल प्रदेश में इसकी लम्बाई लगभग 256 कि.मी. है। जो सतलुज के बाद सबसे ज्यादा है।

व्यास की सहायक नदियाँ (Tributaries of Vyaas):

कुल्लू जिले में पार्वती, पिन, मलाणा नाला, सोलंग, मनालस, फोजल और सरवरी इसकी सहायक नदियां हैं। मण्डी जिले में उहल, ज्यूणी, रमाबिना, हंसा, तीर्थन, बाखली, सुकेती, पनोडी, सोन और बढेड इसकी सहायक नदियां हैं। हमीरपुर में कुणाह और मान तथा कांगड़ा में बिनवा, न्यूगल, बाणगंगा, बनेर, गज, मनूणी व चक्की इसकी सहायक नदीया हैं।

व्यास नदी के मुख्य तथ्य :

  • वैदिक नाम – आर्जीकीया
  • संस्कृत नाम – विपाशा
  • उदगम स्थल – व्यास कुंड (रोहतांग दर्रे के निकट)
  • जल अधिग्रहण क्षेत्र – 13,663 वर्ग कि.मी. 
  • कुल लम्बाई – 460 कि.मी.
  • हिमाचल प्रदेश में लम्बाई – 250 कि.मी.
  • सबसे बड़ी सहायक नदी – पार्वती नदी
  • व्यास नदी ‘मिरथल‘ नामक स्थान पर पंजाब में प्रवेश करती है।

3. रावी नदी (Ravi river):

रावी नदी का वैदिक नाम ‘परुष्णी‘ और संस्कृत नाम ‘इरावती है। यह नदी धौलाधार पर्वत श्रृंखला के बड़ा भंगाल क्षेत्र के मादल और तांतगिरी नामक दो हिमखंडों से निकलती है। स्थानीय भाषा में इसे रोती भी कहते है। इस नदी का कुल जल अधिग्रहण क्षेत्र 5528 कि.मी. है इसकी कुल लम्बाई 720 कि.मी. है तथा हिमाचल में इसकी लम्बाई 158 कि.मी. है।

रावी की सहायक नदियाँ (Tributaries of Ravi):

छतराडी, बोदिल, टुण्हेदन, वलजेडी, साल और स्यूल इत्यादि हैं। रावी नदी की मूलधारा बड़ा भंगाल से निकलकर चुराह के निचले क्षेत्र के चौहडा नामक स्थान पर विशाल नदी का रूप धारण करती है।

रावी नदी के मुख्य तथ्य:

  • वैदिक नाम – परुष्णी
  • संस्कृत नाम – ईरावती
  • उद्गम स्थान –बड़ा भंगाल (कांगड़ा)
  • जल अधिग्रहण – 5528 कि.मी
  • कुल लम्बाई – 720 कि.मी
  • हिमाचल में लम्बाई – 158 कि.मी
  • यह नदी पीर पंजाल श्रेणी को धौलाधार श्रेणी से अलग करती है।
  • अलैक्जेंडर ने इसे ‘रोहुआडिस‘ कहा।

4. चिनाब नदी (Chenab river):

चिनाव नदी को वेदों में ‘असिक्नी‘ के नाम से वर्णित है। इसका उदगम् बृहत् हिमालय पर्वत श्रृंखला के ‘वारालाचा’ दरें (4891 मी.) की ऊँचाई से होता है। चिनाव नदी चन्द्रा और भागा दो नदियों के संगम से बनती है। चन्द्रा नदी चन्द्रताल तथा भागा नदी सूरज ताल से निकलती है। इसलिए यह नदी चन्द्रभागा के नाम से भी प्रसिद्ध है। ये नदियां लाहौल के ‘तान्दी’ नामक स्थान में मिलती हैं। पानी के घनत्व के आधार में यह नदी हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी नदी है। इसका जल ग्रहण क्षेत्र 7850 वर्ग कि.मी. है तथा इसकी कुल लम्बाई 1200 कि.मी है अपितु हिमाचल में इसकी लम्बाई केवल 122 कि. मी है।

चिनाव नदी के मुख्य तथ्य:

  • वैदिक नाम – असिक्नी
  • उद्गम स्थल – बारालाचा दर्रा
  • कुल लम्बाई – 7850 कि.मी
  • हिमाचल में लम्बाई – 1200 कि.मी
  • विद्युत परियोजनाएं – किलाड़, थिरोट, डोडा
  • पांगी घाटी के संसारी नाले के पास हिमाचल को छोड़ती है।

गंगा नदी अपवाह तंत्र:

गंगा नदी अपवाह तंत्र : यह अपवाह तंत्र हिमाचल से प्रवाहित होन वाली यमुना व इसकी सहायक नदियों से सम्बन्धित है। ये नदियां गंगा से मिलकर आगे प्रवाहित होती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।

5. यमुना नदी (Yamuna river):

वेदों में कलिंदी के नाम से वर्णित नदी यमुना उत्तराखंड के उत्तरकाशी नामक स्थान के कालिन्द पर्वत के यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है। इस नदी का पौराणिक सम्बन्ध सूर्य देवता से माना जाता है। इसका जल अधिग्रहण क्षेत्र लगभग 2320 वर्ग कि.मी. है। इसकी कुल लम्बाई 1525 कि.मी. है। हिमाचल प्रदेश में इसकी लम्बाई लगभग 22 कि.मी. है।

यमुना नदी उत्तराखंड में गढ़वाल मण्डल से प्रवाहित होते हुए, हिमाचल के  सिरमौर जिला के खोदर माजरी में प्रवेश करती हैं। यह नदी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखण्ड के मध्य पूर्वी-दक्षिणी छोर पर सीमा विभाजक रेखा है। यमुना हिमाचल में 22 किलोमीटर बहने के बाद कौंच ताजेवाला नामक स्थान पर उत्तराखण्ड में चली जाती है।

यमुना की सहायक नदियाँ (Tributaries of Ravi):

यमुना की प्रमुख सहायक नदियां गिरी, पब्बर, पाताल तथा बाटा है। गिरि नदी का उद्गम स्थल शिमला जिला की जुब्बल तहसील के ‘कुपड़’ स्थान पर स्थित है। यह नदी गिरि गंगा के नाम से भी प्रसिद्ध है। चूड़धार की चोटियों से निकलने वाली पाताल नदी तथा सरस्वती खड्ड इसके साथ मिलकर त्रिवेणी संगम बनाती है। पब्बर नदी का उद्गम स्थल ‘चन्द्रनाहन’ झील है जो चांशल पर्वत पर स्थित है। चिडगाव के समीप इस नदी में आंध्रा खड्ड तथा रोहडू में शिकड़ी – मिल जाती है। पब्बर नदी उतराखंड के आराकोट के पास लगभग 160 किमी. का सफर तय करने के बाद यमुना की प्रमुख सहायक नदी टौंस में मिल जाती है।

यमुना नदी के मुख्य तथ्य:

  • वैदिक नाम – कांलिदी
  • उद्गम स्थल – यमुनोत्री
  • जल ग्रहण क्षेत्र – 2,320 वर्ग कि.मी
  • हिमाचल प्रदेश में कुल लम्बाई – 22 कि.मी

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!