madhya pradesh mineral policy 2010

मध्य प्रदेश में पाए जाने वाले प्रमुख खनिज संसाधन

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madhya pradesh mineral policy 2010

मध्य प्रदेश में खनिज भंडार प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। जिनका मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था (economy) एवं औद्योगिक प्रगति (industrial progress) में महत्त्वपूर्ण योगदान है। यहाँ खनिजों का वितरण विशिष्ट शैल समूहों (specific rock groups) के द्वारा निर्धारित किया जाता है।

  1.  मध्य प्रदेश राज्य को भारत में हीरा उत्पादन (diamond production) के क्षेत्र में एकाधिकार प्राप्त  है।
  2. भारत में ताम्र अयस्क (copper ore) एवं मैंगनीज अयस्क (manganese ore) के उत्पादन में मध्य प्रदेश को प्रथम स्थान प्राप्त है।
  3. भारत में रॉक फॉस्फेट (rock phosphate) एवं चूना-पत्थर (limestone) के उत्पादन में मध्य प्रदेश को द्वितीय स्थान प्राप्त है।
  4. कोयला (Coal) उत्पादन के क्षेत्र में मध्य प्रदेश को देश में चौथा स्थान प्राप्त है।

प्रमुख खनिज संसाधन

लौह अयस्क (Iron ore)

लौह-अयस्क (Iron ore) के उत्पादन की दृष्टि से मध्य प्रदेश को देश में 6वाँ स्थान प्राप्त है। मध्य प्रदेश के जबलपुर, मंडला, बालाघाट और विदिशा आदि जिलों में लौह-अयस्क (Iron ore) के निक्षेप पाए जाते हैं।

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के उत्तर-पूर्वी भाग (बिजवार श्रेणी) में हेमेटाइट अयस्क (Hematite ore) के भंडार पाए जाते हैं।

मैंगनीज (Manganese) 

मध्य प्रदेश को मैंगनीज (Manganese) के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान प्राप्त है। यह धातु आर्कियन काल (Archean period) की धारवाड़ चट्टानों (Dharwad rocks) में सामान्यतः काले रंग के प्राकृतिक भस्म के रूप में पाई जाती है। मैंगनीज (manganese) की खदाने मध्य प्रदेश के झाबुआ, जबलपुर, मंडला आदि क्षेत्रों में है।

बालाघाट जिले (MP) में स्थित भरवेली की खदान एशिया की सबसे बड़ी मैंगनीज की खदान (manganese mine) है।

भारत के कुल मैंगनीज का लगभग 50% भंडार मध्य प्रदेश में उपस्थित है। भारत द्वारा अन्य देशों को भी मैंगनीज का निर्यात किया जाता है।

मुख्यतः मैंगनीज का उपयोग इस्पात उद्योग (steel industry) में होता है, क्योंकि मैंगनीज  (Manganese) व लोहे (Iron) के मिश्रण से  जंगरोधी इस्पात (corrosion-resistant steel) निर्मित किए जाते है। इसके अतिरिक्त मैंगनीज का उपयोग शुष्क बैटरी (dry batteries), काँच उद्योग (glass industry) तथा विभिन्न रासायनिक उद्योगों (chemical industries) में भी किया जाता है।

तांबा (Copper)

आग्नेय (igneous) एवं कायांतरित चट्टानों से (metamorphic rocks) से तांबा (Copper) प्राप्त किया जाता है। विद्युत सुचालक होने के कारण तांबे (Copper) का प्रयोग विद्युत सामग्रियों व उपकरणों के निर्माण में किया जाता है।

मध्य प्रदेश की बैहर तहसील (Balaghat district) में स्थित ‘मलाजखंड’ तांबा (Copper) उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र  है।  इसके अतिरिक्त  जबलपुर (Jabalpur), सागर (Sagar), छतरपुर (Chhatarpur), होशंगाबाद (Chhatarpur) आदि भी तांबा (Copper) के प्रमुख क्षेत्र है।

तांबा (Copper) उत्पादन की दृष्टि से मध्य प्रदेश का देश में प्रथम स्थान है, जबकि संचित भंडार (accumulated reserves) की दृष्टि से देश में तृतीय स्थान प्राप्त है।

टंगस्टन (Tungsten)

टंगस्टन (Tungsten) का उत्पादन मुख्य रूप से बूलफ्राम अयस्क (boolfram ore) से किया जाता है। टंगस्टन (Tungsten) का उपयोग इस्पात काटने, बिजली के बल्ब के फिलामेंट निर्माण (filament manufacturing of electric bulbs), एक्स-रे (X-rays) रेडियो (radios) व टेलिविजन (टेलीविज़न) आदि यंत्रों के निर्माण में किया जाता है।

बॉक्साइट (Bauxite) 

बॉक्साइट (Bauxite), एल्युमीनियम (Aluminum) का एक खनिज अयस्क है। जो मध्य प्रदेश में बॉक्साइट खनन (Bauxite mining) के प्रमुख क्षेत्र  अमरकंटक, शहडोल, मंडला, जबलपुर, कटनी, बालाघाट व सतना है।

Note: बाक्साइट (Bauxite) उत्पादन का प्रमुख केंद्र होने के कारण अमरकंटक को मध्य प्रदेश का रेणुकूट के नाम से जाना जाता है। 

हीरा (Diamond) 

मध्य प्रदेश राज्य को भारत में हीरा उत्पादन (diamond production) के क्षेत्र में एकाधिकार प्राप्त है। जो मुख्यतः आग्नेय चट्टानों (igneous rocks) की किम्बरलाइट शैल (kimberlite rocks) में पाया जाता है। हीरे का उत्पादन मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में होता है।

मध्य प्रदेश में हीरे का अधिकांश खनन नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (National Mineral Development Corporation) द्वारा किया जाता है।

Note: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में भी हीरे के भंडार मिले हैं, जिसके खनन का समझौता ऑस्ट्रेलिया की ग्लोबल माइनिंग कंपनी रियो टिंटो (Rio Tinto) के साथ हुआ है। 

चूना पत्थर (Limestone)

चूना-पत्थर (Limestone) एक महत्वपूर्ण खनिज पदार्थ है, जिसका उपयोग सीमेंट, पेपर, स्टील और चूना उद्योगों में किया जाता है। मध्य प्रदेश में चूना-पत्थर (Limestone) के भंडार क्रिटेशियस शैलों (Cretaceous rocks) एवं विंध्यनकालीन शैल (Vindhyan rock) समूहों में संचित है।

चूना-पत्थर (Limestone) के उत्पादन में मध्य प्रदेश को देश में दूसरा स्थान प्राप्त है।

डोलोमाइट (Dolomite)

चूना पत्थर (Limestone) में मैग्नीशियम (magnesium) की मात्रा 45% से अधिक होने पर इसे डोलोमाइट (Dolomite) कहा जाता हैं, जिसका उपयोग लोहे को साफ करने में होता है। डोलोमाइट (Dolomite) के भंडार मध्य प्रदेश के सागर, कटनी, बालाघाट, जबलपुर, नरसिंहपुर, छतरपुर, मंडला, देवास सिंगरौली, सिवनी और झाबुआ आदि जिलों में हैं।

 चीनी मिट्टी (Ceramic)

चीनी मिट्टी (Ceramic) का मूल नाम ‘केओलिनाइट (Keolinite)’ है। इसका उपयोग कागज़ उद्योग, वस्त्र उद्योग, रबर उद्योग, बर्तन निर्माण आदि उद्योगों में किया जाता है।

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