Major Coal Fields of Madhya Pradesh

मध्य प्रदेश के प्रमुख कोयला क्षेत्र

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मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में कोयले (Coal) के भंडार प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। जो मुख्यत: गोंडवाना शैल समूह (Gondwana Shale Group) में पाया जाता है। मध्य प्रदेश में निम्नलिखित प्रकार का कोयला पाया जाता है –

  • बिटुमिनस (Bituminous ) – मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में सर्वाधिक मात्रा में बिटुमिनस (Bituminous ) प्रकार का कोयला पाया जाता है।
  • एन्थ्रेसाइट (Anthracite) – यह कोयला सबसे उत्तम क्वालिटी का होता है।

कोयला वितरण की दृष्टि से मध्य प्रदेश को दो भागों में विभाजित  सकता हैं।

Major Coal Fields of Madhya Pradesh

मध्य भारत के प्रमुख कोयला क्षेत्र (Major Coalfields of Central India)

अधिकांशतः मध्य प्रदेश के भाग पूर्वी भाग में कोयला खदान (Coal mines) है। जिसके अंतर्गत निम्नलिखित कोयला खदाने (Coal mines) आती हैं – उमरिया, कोरार, सोहागपुर, सिंगरौली और जोहिला नदी क्षेत्र आदि। सोहागपुर कोयला क्षेत्र सर्वाधिक महत्वपूर्ण व बड़ा कोयला क्षेत्र है, जबकि उमरिया सबसे छोटा कोयला क्षेत्र है।

उमरिया कोयला क्षेत्र 

यह सबसे छोटा कोयला खनन केंद्र है, जिसका क्षेत्रफल मात्र 15.5 sq. km. तथा मोटाई 1.5 meter से 2.5 meter है। । यहाँ कोयले की छह परतें पाई जाती हैं, जिनमें से  4 में उत्खनन कार्य संभव है।

उमरिया रेलवे स्टेशन (Umaria railway station) के समीप दूसरी तथा तीसरी परत में उत्खनन कार्य जारी है।

सोहागपुर कोयला क्षेत्र 

यह मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा कोयला उत्खनन केंद्र है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 4,142 sq. km. है। सोहागपुर कोयला क्षेत्र के अंतर्गत झिलमिल, सोनाहट तथा कोरिया कोयला क्षेत्र भी सम्मिलित हैं। सोहागपुर कोयला क्षेत्र शहडोल एवं अनूपपुर जिले में विस्तृत है।

सिंगरौली कोयला क्षेत्र 

सिंगरौली कोयला क्षेत्र का विस्तार सीधी से दक्षिणी मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) तक लगभग 2330 sq. km. क्षेत्र में  है। इस क्षेत्र में कोयले की कई परते है जिनकी मोटाई लगभग 1.5 meter से 2 meter तक है जिसमें लगभग 48% तक कोयला मिलता है।

इस क्षेत्र में उच्च कोटि का कोयला पाया जाता है, जिन पर कई सुपर थर्मल पावर स्टेशन (super thermal power stations) संचालित होते हैं।

कोरार कोयला क्षेत्र 

उमरिया से उत्तर दिशा में लगभग 11 km दूरी पर कोरार कोयला क्षेत्र  स्थित है, जो लगभग 24 sq. km. क्षेत्र में विस्तृत है। इस क्षेत्र में कोयले की चार परतें पायी जाती  हैं, जिनकी मोटाई लगभग 1.5 meter से 2.4 meter  तक है।

जोहिला नदी कोयला क्षेत्र

जोहिला नदी कोयला क्षेत्र का विस्तार लगभग 39 sq. km. क्षेत्र में है। इस क्षेत्र में कोयले की 6 परतें पाई जाती हैं। इस क्षेत्र में भी उच्च कोटि का कोयला मिलता है।

कोरार कोयला क्षेत्र  के दक्षिण में बिरसिंहपुर के समीप तथा कटनी-बिलासपुर रेलवे लाइन के मध्य जोहिला नदी कोयला क्षेत्र स्थित है।

सतपुड़ा कोयला क्षेत्र (Satpura Coal Field)

भौगोलिक दृष्टि से सतपुड़ा कोयला क्षेत्र को दो भागों में विभाजित किया गया है –

उत्तरी सतपुड़ा – इस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वाले प्रमुख कोयला क्षेत्र मोहपानी, शाहपुरा, सोनादा, तवा, गुरमुंड, दुलहरा, खाद तथा तांदसी।

 दक्षिणी सतपुड़ा – इस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वाले प्रमुख कोयला क्षेत्र कान्हन, नर्मदा तथा पेंच घाटी की खदानें आती हैं, जिनका विस्तार बैतूल से छिंदवाड़ा तक हैं।

मोहपानी कोयला क्षेत्र 

मोहपानी में मुख्यत: साधारण प्रकार का कोयला पाया जाता है, यह क्षेत्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योकिं यह मुंबई-जबलपुर रेलवे लाइन के समीप होने के कारण कोयले का वितरण एवं उत्खनन सुविधाजनक है।

इस क्षेत्र में कोयले की 4 मोटी परतें पाई जाती हैं, जिनकी मोटाई लगभग 0.9 से 5.4 meter तक हैं।

शाहपुरा कोयला क्षेत्र 

शाहपुरा कोयला क्षेत्र होशंगाबाद तथा बैतूल के मध्य तवा नदी घाटी क्षेत्र में विस्तृत है। इस क्षेत्र में अनेक छोटी खदानें स्थित है, जैसे – दुलहरा गुरमुंड, तांदसी, सोनादा तथा ब्रह्मणपारा-खापा हैं।

इस क्षेत्र में कोयले की 3 परतें पाई जाती हैं, जिनकी मोटाई लगभग 1.2 से  5.9 meter तक हैं। यहाँ तवा सारणी नामक स्थान पर विद्युत-केंद्र (power station) स्थापित किया गया है।

कान्हन कोयला क्षेत्र 

कान्हन कोयला क्षेत्र, दक्षिणी सतपुड़ा में स्थित है, इस क्षेत्र में अनेक छोटी खदानें स्थित है, जैसे – छपाट, दमुआ-कालिन, धोरावादी, जमाई पनारा, नीम खेरा, दातला तथा    जिनौर क्षेत्र सम्मिलित हैं। यहाँ से साधारण श्रेणी का कोयला प्राप्त होता हैं।

पेंच घाटी कोयला क्षेत्र

कान्हन क्षेत्र का ही एक भाग पेंच घाटी क्षेत्र के अंतर्गत घाटी आता है। इस कोयला क्षेत्र का विस्तार बरकुही, चाँदमेटा क्षेत्र में परासिया तथा पेंच तक हैं। इस क्षेत्र में कोयले की कई परतें पाई जाती हैं, जिनकी मोटाई लगभग  1.5 से 3.6 meter तक हैं।

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