enviourment and ecology

भारत में पर्यावरण संरक्षण के लिए दिए जाने वाले प्रमुख पुरस्कार और फ़ेलोशिप

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भारत सरकार द्वारा पर्यावरण व् वन्यजीव संरक्षण (Environment and Wildlife Conservation) के क्षेत्र में विशेष कार्य करने वाले व्यक्तियों को प्रोत्साहन देने के लिए फ़ेलोशिप और पुरस्कार कार्यक्रम चलाया जा रहा है, यह पुरस्कार उन व्यक्तियों के के नाम पर दिया जाता है जो भारत में पर्यावरण व वन्यजीव संरक्षण के लिए विशेष कार्य कर चुके है।

अमृतादेवी विश्नोई वन्यजीव सुरक्षा पुरस्कार

यह पुरस्कार वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में विशेष योगदान देने के लिए व्यक्तियों या संगठनों प्रदान किया जाता है, इस पुरस्कार के अंतर्गत सम्मानित किये जाने वाले व्यक्तियों या संगठनों को 1 Lakh की नकद राशि प्रदान की जाती है।

इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्ष मित्र पुरस्कार 

यह पुरस्कार उन व्यक्तियों या संगठनों को दिया जाता है, जिन्होंने वनीकरण और बंजर भूमि विकास के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया हो। इस पुरस्कार के अंतर्गत सम्मानित किये जाने वाले व्यक्तियों या संगठनों को 4 श्रेणियों में 2 लाख 50 हजार की नकद राशि प्रदान की जाती है।

मेदिनी पुरस्कार योजना (Medini Award Scheme)

मेदिनी पुरस्कार, भारतीय लेखकों को प्रतिवर्ष पर्यावरण तथा उससे संबंधित क्षेत्रों, जैसे- वन्यजीव संरक्षण, जल संसाधन संरक्षण आदि में मूल कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिये दिया जाता है। इस श्रेणी अंतर्गत 4 नकद पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं।

प्रदूषण निवारण के लिये राष्ट्रीय पुरस्कार (National Award for Prevention of Pollution)

यह पुरस्कार देने की शुरुआत वर्ष 1992 में की गई थी। यह पुरस्कार प्रदूषण निवारण के लक्ष्यों को प्राप्त करने तथा पर्यावरण में सुधार के लिए महत्त्वपूर्ण एवं सतत्, प्रयास करने वाली 18 बड़ी औद्योगिक इकाइयों (large industrial unit)  तथा 5 लघु औद्योगिक इकाइयों (Small industries unit) को वार्षिक रूप से दिया जाता है। इस पुरस्कार के अंतर्गत प्रत्येक बड़ी तथा लघु औद्योगिक इकाइयों को एक ट्रॉफी, एक प्रशस्ति पत्र और ₹1 लाख की नकद राशि दीजाती है।

इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार (Indira Gandhi Environment Award)

वर्ष 1987 से पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change) द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की याद में प्रतिवर्ष यह पुरस्कार पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में प्रमुख कार्य करने वाले व्यक्तियों और संगठनों को प्रदान किया जाता है। शुरुआत में इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार में  ₹1 लाख की नकद राशि प्रदान की जाती थी। वर्तमान में इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार निम्नलिखित श्रेणी के अंतर्गत जाते है –

  • ‘संगठन श्रेणी’ के अंतर्गत ₹ 5,00,000 के दो नकद पुरस्कार दिए जाते है।
  • व्यक्तिगत श्रेणी के अंतर्गत ₹ 5,00,000, ₹ 3,00,000 और ₹ 2,00,000 के 3 नकद पुरस्कार तथा इसके साथ एक रजत ट्रॉफी तथा प्रशस्ति पत्र दिया जाता है।

Global 500पर्यावरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environment Program – UNEP) द्वारा वर्ष 1987 से विभिन्न व्यक्तियों एवं संगठनों को यह पुरस्कार दिया जा रहा है।

जैव-विविधता हेतु पीताम्बर पंत राष्ट्रीय पर्यावरण फेलोशिप एवं B.P पाल राष्ट्रीय पर्यावरण फेलोशिप 

यह राष्ट्रीय फेलोशिप प्रत्येक वर्ष पर्यावरण (environment), विज्ञान (science) एवं जैव-विविधता (biodiversity) के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण अनुसंधान तथा विकास योगदानों की मान्यता स्वरूप, भारतीय राष्ट्रीयता वाले किसी एक विशेषज्ञ को प्रदान की जाती है। इस फेलोशिप की अवधि 2 वर्ष की होती है।

डॉ. सलीम अली राष्ट्रीय वन्यजीव फेलोशिप पुरस्कार (Dr. Salim Ali National Wildlife Fellowship Award)

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा पक्षी, वन्यजीव और स्तनधारी वन्यजीवों के संरक्षण व अनुसंधान के लिए क्रमश: वर्ष 1995 और वर्ष 1996 में डॉ. सलीम अली राष्ट्रीय वन्यजीव फेलोशिप पुरस्कार और श्री कैलाश सांखला राष्ट्रीय वन्यजीव फेलोशिप पुरस्कार दिए जाने की शुरुआत की गयी।

इन पुरुस्कारों की शुरूआत वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत वन्यजीव प्रबंधकों एवं वैज्ञानिकों  को प्रेरित एवं प्रोत्साहन देने के लिए किया जाता है।

Note: श्री कैलाश सांखला राष्ट्रीय वन्यजीव फेलोशिप पुरस्कार 2 वर्ष के अंतराल में दिया जाता है। 

मरुभूमि पारिस्थितिकी फेलोशिप (Desert Ecology Fellowship)

वर्ष 1992 में पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा विश्नोई समुदाय के पर्यावरण संरक्षण के प्रति योगदान को मान्यता प्रदान करने और इस क्षेत्र में अध्ययन को प्रोत्साहिन देने के लिए जोधपुर विश्वविद्यालय में मरुस्थल पारिस्थितिकी फेलोशिप  (Desert Ecology Fellowship) की स्थापना  के लिए  ₹ 6 लाख नकद राशि प्रदान की गयी थी। मरुभूमि पारिस्थितिकी फेलोशिप में ₹3500 प्रतिमाह की वृत्ति और ₹ 1000 प्रतिमाह का आकस्मिक अनुदान दिया जाता है।

राजीव गांधी वन्यजीव संरक्षण पुरस्कार (Rajiv Gandhi Wildlife Conservation Award)

यह पुरस्कार वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान के लिये दिया जाता है, यह पुरस्कार उन व्यक्तियों को दिया जाता है, जिन्होंने वन्यजीव संरक्षण पर मुख्य प्रभाव डाला हो या उससे ऐसा होने की संभावना हो। राजीव गांधी वन्यजीव संरक्षण पुरस्कार के अंतर्गत  शैक्षणिक एवं शोध संस्थाओं, संगठनों, वन एवं वन्यजीव अधिकारियों तथा शोधकार्य में संलग्न वन्यजीव संरक्षणविदों को ₹ एक – एक लाख के दो नकद पुरस्कार दिये जाते हैं।

स्वच्छ प्रौद्योगिकी के लिये राजीव गांधी पर्यावरण पुरस्कार (Rajiv Gandhi Environment Award for Clean Technology)

यह पुरस्कार उन औद्योगिक इकाइयों को दिया जाता है जो नई प्रौद्योगिकी को अपनाते या उनके विकास में योगदान देते हैं, जिससे पर्यावरणीय प्रदूषण (environmental pollution) में कमी आती है या उसकी रोकथाम होती है। स्वच्छ प्रौद्योगिकी के लिये राजीव गांधी पर्यावरण पुरस्कार के अंतर्गत ₹ 2 लाख की नकद राशि, ट्रॉफी एवं प्रशस्ति पत्र दिए जाते हैं।

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