उत्तराखंड – चंद वंश से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 2)

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  • कुमाऊँ में चंद वंश का संस्थापक सोमचंद था, जो इलाहाबाद के झूसी का रहने वाला था।
  • पुण्यताल (सातताल) उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले में स्थित है।
  • चंद शासक रुद्रचंद द्वारा वर्ष 1588 (लाहौर) में मुग़ल शासक अकबर को तिब्बती याक, कस्तूरी मृग, हिरन की खाले भेट की गयी थी।
  • चंद शासक गरूड़ ज्ञान चंद द्वारा पिंडर घाटी (गढ़वाल) पर प्रथम आक्रमण किया गया था।
  • चंद वंश के शासनकाल में अनाज के रूप में बै कर लिया जाता था।
  • चंद शासकों द्वारा भूमि निर्धारण का कार्य और ग्राम पधान (मुखिया) की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गयी थी।
  • चंद वंश के शासनकाल में खेतों में कृषि कार्य करने वालो को कैनी तथा खरीदे गए नौकर को छयोडा कहा जाता था।
  • कीर्तिचंद, चंद वंश का प्रथम शासक था, जिसने गढ़वाल पर सबसे पहले आक्रमण किया था।
  • जगतचंद के शासन काल को चंद वंश का स्वर्ण काल कहा जाता था।
  • चंद शासक त्रिमलचंद की सोने की जनेऊ, जागेश्वर मंदिर से प्राप्त हुई है।
  • चंद शासक भीष्मचंद द्वारा सूर राजवंश के विद्रोही सेनानायक “खवास” को संरक्षण दिया  गया था।
  • राजबुंगा किले का निर्माण चंद वंश के संस्थापक सोमचंद द्वारा किया गया था। सोमचंद को ही पंचायती राजव्यवस्था का जनक माना जाता है।
  • चंद साम्राज्य में प्रचलित ‘माल’ शब्द तराई-भाबर क्षेत्र किस क्षेत्र के लिए प्रयोग किया जाता था।
  • गरुड़ ज्ञानचंद द्वारा अपने राज्य के सेनापति नीलू कठायत को कुम्यया खिल्लत की उपाधि दी गई थी।
  • चंद शासक रत्नचंद द्वारा सोरघाटी (पिथौरागढ़) पर आक्रमण कर मल्ल शासकों को पराजित किया गया था।
  • कुमाऊँ क्षेत्र में भूमि की माप करने वाला सर्वप्रथम शासक रत्नचंद था।
  • चंद वंश का संस्थापक कीर्तिचंद, नाथ संप्रदाय से सर्वाधिक प्रभावित था, कीर्तिचंद के द्वारा देघाट मार्ग को गढ़वाल व कुमाऊं की सीमा बनाया गया था।
  • रौतेला जाति के लोगो को चंद वंश का स्तंभ माना जाता था।
  • रुद्रचंद के शासनकाल में नवाब हुसैन खां द्वारा तराई क्षेत्र पर आक्रमण कर अपार सम्पत्ति लूटी गयी थी। चंद शासक रुद्रचंद्र द्वारा किस अंतिम कत्यूरी शासक सुखलदेव की हत्या की गई थी।
  • चंद शासक लक्ष्मीचंद को लखुली विराली के नाम से भी जाना जाता था।

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