कातकरी जनजाति

कातकरी जनजाति (Katkari Tribe)

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शाहपुर (महाराष्ट्र) में निवास करने वाली कातकरी जनजाति (Katkari Tribe) के युवाओं द्वारा लॉकडाउन के दौरान गिलोय (Giloy) और अन्य उत्पादों को ऑनलाइन बेचकर प्रसिद्ध हो रहे हैं।

प्रधानमंत्री वन धन योजना (PMVDY) के अंतर्गत गठित ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (TRIFED) के द्वारा साहयता प्राप्त होती है।

  • TRIFED जनजातीय मामलों के मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर की एक सर्वोच्च संस्था है।

गिलोय (टीनोस्पोरा कोर्डिफ़ोलिया) एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसका उपयोग भारतीय चिकित्सा पद्धति में प्राचीन काल से किया जा रहा है।

प्रमुख बिंदु 

कातकरी जनजाति को 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) में से एक है।

कातकरी जनजाति मुख्य रूप से रायगढ़ और महाराष्ट्र के पालघर, रत्नागिरी और ठाणे जिलों के साथ-साथ गुजरात के कुछ स्थानों में निवास करती हैं।

यह जनजाति ऐतिहासिक रूप से आदिवासी थी।

  • कातकरी नाम का उद्भव वन-आधारित गतिविधि से हुआ है, खैर (बबूल) के पेड़ से कतेचू (Catechu) बनाना या बेचना।
  • कतेचू (Catechu) बबूल के पेड़ों का एक अर्क है जिसे विभिन्न प्रकार के खाद्य योज्य पदार्थों, डाई आदि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। कतेचू (Catechu) को बबूल की लकड़ी को उबालकर निकाला जाता है और उसके परिणामस्वरूप काढ़ा बनाया जाता है।

ब्रिटिश प्रशासन द्वारा उन्हें आपराधिक जनजाति अधिनियम – 1871 के अंतर्गत वर्गीकृत किया था।

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