उत्तराखंड में जनता से लिए जाने वाले महत्वपूर्ण कर

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  • टांड कर – यह कर वस्त्र बुनकरों से लिया जाता था।
  • कटक कर – यह कर सेना के रख-रखाव के लिए लिया जाता था।
  • बैकर कर – यह कर अनाज के रूप में लिया जाता था।
  • कनक कर – इस कर का उल्लेख मूनाकोट ताम्रपत्र में है, यह कर व्यापारियों से स्वर्ण धूल के रूप में लिया जाता था।
  • पहरी या पौरी कर – यह कर राजधानी व प्रमुख गाँवों की रखवाली करने वालों को देय होता था।
  • बखरिया कर –  यह प्रत्येक गाँव से लिया जाने वाला कर था।
  • घोडयालो कर – यह कर राजा के घोड़ों के रख-रखाव के लिए लिया जाता था।
  • कुकुरालो कर – यह कर राजा के कुत्तों के रख-रखाव के लिए लिया जाता था।
  • चोपदार कर – यह कर राजा की व्यक्तिगत वस्तुओं (जैसे – तलवार व ढाल आदि) के लिए लिया जाता था।
  • बाजदार कर – यह कर महाजन को देय होता था।
  • बजनिया  कर – यह कर राजा के दरबार में नृत्य करने वाले नर्तक व नर्तकियों के लिये लिया जाता था।
  • राखिया कर – यह कर रक्षाबंधन व जनेऊ पर लिया जाता था।
  • मांगा कर – यह कर युद्ध के समय लिया जाने वाला कर था, जो 1 रुपया प्रति व्यक्ति लिया जाता था।
  • सिरतोकर कर – यह अनाज के रूप में लिया जाने वाला कर था।
  • खैनी कपिलनी कर – यह कुली बेगार कर था।
  • भेंट कर – यह राजकुमारों को भेंट स्वरुप दिया जाने वाला कर था।
  • कुशही कर – गोरखा शासन यह ब्राह्मणों से लिया जाने वाला कर था।
  • स्यूक कर – यह कर राज सेवकों के लिए लिया जाता था।
  • सीकदार नेगी – यह कर परगना अधिकारी को दिया जाता था।
  • हिलयानी अधूल – यह कर बरसात में सड़कों की मरम्मत के लिए लिया जाता था।
  • डाला कर – यह कर सयानों को अनाज के रूप में दिया जाने वाला कर। मिझारी– कामगारों से लिया जाने वाला कर।
  • खैकर कर – खेती करने के बदले राजा को दिया जाने वाला कर
  • घी कर – यह कर दूध देने वाले जानवरों पर लिया जाता था।
  • मौ कर – यह कर मधुमक्खी (honey bee) पालन करने वालों से लिया जाता था।
  • भात कर – यह कर भात (चावल) की दावत पर लिया जाता था।
  • गौ-चराई कर – यह कर गाय की चराई पर लिया जाता था।
  • भैंस कर – यह कर अंग्रेज़ कमिश्नर ट्रेल द्वारा लगाया गया था, जो सालाना प्रत्येक भैंस पालने वाले परिवारों को देना होता था।
  • व्यापार कर – यह कर नमक व कस्तूरी के व्यापार पर लिया जाता था।
  • खान कर – यह कर तांबा निकालने वालों से लिया जाता था।
  • न्यौवाली कर – यह कर न्याय पाने की इच्छा रखने वालों से लिया जाता था।
  • जगरिया कर – यह कर जागर लगाने वालो से लिया जाता था।
  • रोल्या देवल्या कर – यह कर देवी-देवताओं की पूजा करने पर लिया जाता था।
  • भाग कर – यह कर घराटों (गेहूँ पीसने वाली पानी की चक्की) पर लिया जाता था।
  • रंतगली कर – यह लेखकों से लिया जाने वाला कर था।

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