उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 25)

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दंगलेश्वर महादेव (Dangaleshwar Mahadev) का मंदिर उत्तराखंड के सतपुली (पौड़ी) नगर में स्थित है।

रथी देवता का मंदिर उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के अलेरू किल्याखाल में स्थित है।

माता सुखरौ देवी का मंदिर उत्तराखंड के कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल) नगर में स्थित है।

झूला देवी मंदिर (Jhula Devi Temple) उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित है।

त्रिलोचन पाण्डेय की प्रमुख रचनाएँ –  कुमाऊं लोक साहित्य की पृष्ठ भूमि, कुमाऊं का साहित्य।

बद्रीदत्त पांडे ने श्रीदेव सुमन को गढ़वाल का अभिमन्यु की संज्ञा दी है।

हेवल घाटी आंदोलन, चूना पत्थर खदान से संबंधित है।

गढ़वाली साहित्य के लिए जय श्री सम्मान के प्रेणता बुद्धिबल्लभ थपलियाल थे।

कुमाऊं पेंटिंग्स (Kumaon Paintings) नामक पुस्तक की रचना यशोधर मठपाल ने की थी।

कुमाऊँ के कमिश्नर सर हैनरी रैमजे को कुमाऊं का बेताज बादशाह, रामजी व भाबर का विश्वकर्मा आदि नामों से जाना जाता है। गांधी जी ने वर्ष 1929 में गढ़वाल की की थी।

न तुलसी को बहुत पवित्र माना जाता है, जिसकी माला बद्रीनाथ धाम में चढ़ाई जाती है।

देहरादून के डोईवाला में स्थित चीनी मिल उत्तराखंड की सबसे पुरानी चीनी मिल (Sugar mill) है, जिसकी स्थापना वर्ष 1930 में की गयी थी।

ब्रिटिश कमिश्नर ट्रेल द्वारा कुमाऊं मंडल में गौ हत्या पर प्रतिबंध लगाया गया था।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में पहले हार्ट केयर सेंटर का लोकार्पण किया गया है।

नकरौदा (देहरादून) उत्तराखंड का प्रथम गांव है जहां किसानों को राष्ट्रीय स्तर की कृषि ट्रेनिंग दी जाती है।

वर्ष 1917 में कुमाऊं परिषद का प्रथम सम्मेलन अल्मोड़ा में हुआ था, जिसकी अध्यक्षता जयदत्त जोशी ने की थी।

वर्ष 1905 में कांग्रेस के बनारस अधिवेशन में बद्रीदत्त जोशी पहली बार बाल गंगाधर तिलक से मिले थे।

वर्ष 1920 में मोतीलाल नेहरू, अल्मोड़ा की यात्रा पर आये थे।

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