उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 21)

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  • वर्ष 1908 में जोध सिंह नेगी द्वारा पौड़ी गढ़वाल में कुली एजेंसी की स्थापना की गयी थी।
  • पंडित गोविंद बल्लभ पंत द्वारा फारेस्ट प्रॉब्लम ऑफ कुमाऊं (Forest problem of Kumaon) नामक पुस्तक की रचना की गयी थी।
  • भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान मदन मोहन उपाध्याय द्वारा भूमिगत रेडियो संचालन किया जाता था।
  • वर्ष 1935 में सत्यप्रकाश रतूड़ी द्वारा सकलाना पट्टी (टिहरी) में बाल सभा की स्थापना की गयी थी।
  • 23 जनवरी 1939 को (चुक्खूवाला) देहरादून में टिहरी प्रजा मण्डल की स्थापना की गयी थी।
  • प्राचीनकाल में नानकमत्ता को बक्शी नाम से जाना जाता था।
  • पुस्ठारा बुग्याल, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में स्थित है।
  • गुरसों बुग्याल, उत्तराखंड के चमोली जनपद में स्थित है। इसी बुग्याल के पास हाथी पर्वत स्थित है।

चैतोल त्यौहार

  • चैतोल उत्तराखंड में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्यौहार है। यह त्यौहार प्रत्येक वर्ष चैत माह में मनाया जाता है। चैत माह में भाइयों द्वारा विवाहित बहनों से मुलाकात कर उन्हें उपहार दिए जाने की परंपरा है, जिसे भिटौली कहा जाता है।
  • चैतोल त्यौहार मुख्यतः पिथौरागढ़ व चम्पावत में मुख्य रूप से मनाया जाता है।

  • रहाली और खलिया बुग्याल उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद में स्थित है।
  • धरोहर अनुपम (पिथौरागढ़)क्रीड़ा पथ नामक पुस्तकों की रचना राजेश मोहन उप्रेती द्वारा की गयी थी।
  • खतलिंग रुद्रादेवी यात्रा (Khatling Rudradevi Yatra) को उत्तराखंड की पांचवा धाम माना जाता है, खतलिंग रुद्रादेवी मंदिर उत्तराखंड के टिहरी जनपद में स्थित है।
  • उत्तराखंड के चमोली जनपद के डूंगी पैतोली में सरकार द्वारा बाँज के वृक्ष काटे जाने में स्थानीय जनता द्वारा विरोध किया गया, जिसे डूंगी पैतोली आंदोलन के नाम से जाना जाता है।
  • वर्ष 1989 में ‌पौढ़ी गढ़वाल के उफरैंखाल गांव में पानी के संरक्षण के लिए स्थानीय युवाओं द्वारा एक आंदोलन चलाया गया, जिसे पाणी राखों आंदोलन के नाम से जाना जाता है। इस आंदोलन के प्रणेता शिक्षक व पर्यावरणविद् सच्च्दिनंद भारती जी थे।
  • विष्णु भगवान के पांचवे अवतार (बामन अवतार) की मूर्ति उत्तराखंड के काशीपुर में है।
  • उत्तराखंड के देहरादून जिले में स्थित लाखामण्डल से भगवान शिव की संहारक की एक मूर्ति प्राप्त हुई।
  • गोरखों शासकों द्वारा ब्राह्मणों पर कुसही नामक कर लगाया गया था।

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