human disease

मानव रोग (Human disease, Part – I)

5 mins read

सामान्यतः कहा जाता है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करत है। किन्तु अच्छे स्वास्थ्य में व्यवधान उत्पन्न होना ही रोग (Diseases) है। मानव शरीर में विभिन्न विकारों को उनकी प्रकृति व कारण के आधार पर विभाजित किया गया है। जैसे उपापचयी या विकासीय अनियमितताओं के कारण होने वाले रोगों को जन्मजात रोग (Cogential diseases) कहा जाता है, और जन्म के पश्चात विभिन्न कारकों की वजह से होने वाले रोगों को उपार्जित रोग (Acquired diseases) कहते हैं।

human disease

रोगों के प्रकार (Types of disease)

रोग या बीमारी का कोई एक कारक है, जिसके कारण रोग उत्पन्न होता है, इन्हीं कारको को निम्नलिखित तरीकों से वर्णित किया गया है

  • जीवाणु जनित रोग (Bacterial diseases)
  • विषाणु जनित रोग (viral disease)
  • कृमिरोग / हेल्मिन्थ जनित रोग (Helminthiasis)
  • मनुष्य में परजीवियों द्वारा होने वाले प्रमुख रोग
  • कमी/अभाव से होने वाले रोग
  • प्रमुख अन्तःस्रावी रोग

विषाणु (वायरस) जनित रोग

रोगकारकफैलाव तथा संक्रमण काल
रोग के मुख्य लक्षण एवं कारण
स्मॉल पॉक्स (Small pox)वैरियोला वायरस (Viroidal Virus)सीधे सम्पर्क तथा संक्रमित वस्तुओं द्वारा 12 दिन तक
तेज बुखार, सिर तथा बदन दर्द, त्वचा पर लाल धब्बे, बाद में फफोला उत्पन्न होना जिसमें साफ जलीय पदार्थ भरा होता है, त्वचा पर गड्ढे निशान का उत्पन्न होना
चीकन पॉक्स
वैरिकोला वाइरस
सीधा सम्पर्क तथा संक्रमित वस्तुओं द्वारा 12-16 दिनजाड़ा, बुखार, त्वचा पर फफोले पड़ना, जो 5-20 दिन में समाप्त हो जाते हैं।
जुकामराइनोवाइसरसीधा सम्पर्क, 2-5 दिनसिर दर्द, सर्दी, नाक से पानी बहना, हल्का बुखार
इन्फ्लुएन्जा
आर्थोमिजे वाइरस
सम्पर्क तथा संक्रमित व्यक्ति के श्वसन द्वारा छोड़ी गयी हवा से, 1-2 दिन।बुखार, पेशियों में दर्द, ठंड लगना, सूखी खांसी, न्यूमोनिया के लक्षणों का होना, आदि
रूवीयोला
पैरमिक्सो वाइरस -
सीधा सम्पर्क बात करते समय मुंह से निकले द्रव तथा खांसी द्वारा निकले द्रव द्वारा 2-3 दिन बाद से श्वसन तेजप्राथमिक अवस्था में नाक से पानी बहना, छोक, बुखार, सिर दर्द, पीठ दर्द तथा जाड़ा लगनाः द्वितीय अवस्था में म्यूकस झिल्ली के ऊपरी भाग में जलन होता है तथा लगातार म्यूकस स्राव होता है
मम्पस
मम्पस वाइरस
सीधा सम्पर्क, नाक के स्राव तथा लार में उपस्थित वाइरस लार ग्रन्थि पर हमला करता है। 12-21 दिन स्रावित होती है।प्राथमिक अवस्था में बुखार, सिर दर्द, बदन दर्द, जीभ लाल हो जाती है तथा लार अधिक या बिल्कुल कम निकलती है
पोलियो
निस्यन्दी
सम्पर्क घरेलू माक्स तथा भोजन
प्रारंभिक लक्षण-सिर दर्द, उल्टी, तेज बुखार, बाद के लक्षण-कमजोरी, पीट तथा गर्दन में अंकड़न, अपंगता से (एक से अधिक अंगों में)
रेबीजरेबीज वाइरस
पागल कुत्ते के काटने से, (तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है। 2-16 सप्ताह या अधिक सिर दर्द, नकसीर, उल्टी, बुखार, नींद नहीं आना, जल से डर लगना, 'अपंगता तथा मृत्यु
एड्स (AIDS)
HIV - III
समान तथा असमान लोगों के संपर्क द्वारा, खून द्वारा, वेश्यावृत्ति तथा नशे में ली जाने वाले सामूहिक सूई द्वाराशरीर के वजन में 10% की कमी, बिना किसी उत्पत्ति कारण से बुखार, लिम्फ ग्रंथि में सूजन, मुह का अल्सर, डायरिया, ब्रेन टॅयूमर
टाइफस
रिक्टेसिया प्रोवाजेकीजू के द्वारा, कुपोषण तथा अस्वच्छता तेज बुखार, त्वचा के जलन, सिर दर्द
पेचिसट्रेपोनेमा पैलिडियमसीधा संपर्क, लैंगिक सहवास एक कठोर दर्द रहित अल्सर का जननांग पर बननी, विभिन्न फफोलों का त्वचा पर उत्पन्न होना

जीवाणु (बैक्टीरिया) जनित रोग

रोग का नामरोगाणु का नामप्रभावित अंगलक्षण
हैजाबिबियो कोलेरीपाचन तंत्रउल्टी व दस्त, शरीर में ऐंठन एवं डिहाइड्रेशन
टीबीमाइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिसफेफड़ेखांसी, बुखार, छाती में दर्द, मुंह से रक्त आना
कुकुरखांसी
वैसिलम परटूसिसफेफड़ाबार-बार खांसी का आना।
न्यूमोनियाडिप्लोकोकस न्यूमोनियाईफेफड़ेछाती में दर्द, सांस लेने में पेरशानी
ब्रोंकाइटिसजीवाणु
श्वसन तंत्रछाती में दर्द, बुखार, सांस लेने में परेशानी
प्लूरिसीजीवाणु
फेफड़ेछाती में दर्द, बुखार, सांस लेने में परेशानी
प्लेगपास्चुरेला पेस्टिसलिम्फ ग्रंथियां
 शरीर में दर्द एवं तेज बुखार, आंखों का लाल होना तथा उल्टी
डिप्थीरियाकोर्नी वैक्ट्रियमगलागलशोथ, श्वांस लेने में दिक्कत
कोढ़माइक्रोबैक्टीरियम लेप्रीतंत्रिका तंत्र
अंगुलियों का कट-कट का गिरना, शरीर पर दाग
टाइफायडटाइफी सालमोनेलआंतबुखार का तीव्र गति से चढ़ना, पेट में दिक्कत और बदहजमी
टिटनेसक्लोस्टेडियम टिटोनाईमेरुरज्जु
मांसपेशियों में संकुचन एवं शरीर का बेडौल होना
सुजाकनाइजेरिया गोनोरीप्रजनन अंगजेनिटल ट्रैक्ट में सूजन एवं घाव. मत्र त्याग में परेशानी
सिफलिसट्रिपोनेमा पैडेडमप्रजनन अंगजेनिटल ट्रैक्ट में सूजन एवं घाव, मूत्र त्याग में परेशान
मेनिनजाइटिसट्रिपोनेमा पैडेडममस्तिष्कसरदर्द, बुखार, उल्टी एवं बेहोशी
इंफ्लूएंजाफिफर्स वैसिलसश्वसन तंत्रनाक से पानी आना, सिरदर्द, आंखों में दर्द
ट्रैकोमा
बैक्टीरियाआँखसरदर्द, आंख दर्द
राइनाटिसएलजेनटसनाक
नाक का बंद होना, सरदर्द
स्कारलेट ज्वरबैक्टीरियाश्वसन तंत्रबुखार

हेल्मिन्थ जनित रोग

रोग का नामकारकप्रभावित
फाइलेरियावाउचेरिया बान्क्रॉफ्टीअंग हाथ, पैर, अंडकोष, शिशन, आदि
टीनिएसिसटीनिया सोलियम (टेप वर्म),आंत
एन्सायलोस्टोमेसिसएन्सायलोस्टोमा डियोडिनेलछोटी आंत
एस्केरिएसिसएस्केरिस लुम्ब्रिक्वायड्सछोटी आंत
सिस्टिसिरकोसिस टीनिया का लार्वामस्तिष्क

मनुष्य में परजीवियों द्वारा होने वाले प्रमुख रोग

रोग का नामप्रभावित अंगपरजीवी का नाम
पायरियामसूड़ेएन्टामीबा जिन्जीवेलिस
दस्तबड़ी आंतट्राइकोमोनस होमिनिस
अमीबॉयसिसबड़ी आंतएन्टामीबा हिस्टोलिटिका
अतिसारआंत का अगला भागजियार्दिया लैम्बलिया
सुजाक तथा श्वेत प्रदरमूत्र मार्गटाइकोमोनस वेजाइनलिस
कालाजाररुधिर, प्लीहा एवं अस्थि मज्जालौशमनिया, डोनावामी
निद्रा रोगरुधिर, केन्द्रीय तंत्रिका तंत्रट्राइपैनोसोमा गैम्बियन्स
मलेरियालाल रक्त कणप्लाज्मोडियम

कमी/अभाव से होने वाले रोग

जीरोप्थेलमिया (Xeropthalmia)विटामिन A की कमी के कारण नेत्र की कॉर्निया का शुष्क हो जाना।
निक्टालोपिया (Nyctalopia)
विटामिन A की कमी के कारण होने वाला सामान्य रतौंधी रोग
क्याशियोरकॉर (Kwashiorkor)प्रोटीन की कमी के कारण होने वाला रोग
हिमारेजी (Haemorrhage)विटामिन K की कमी के कारण होने वाला रक्तस्रावी रोग

प्रमुख अन्तःस्रावी रोग

रोग
कारण
मधुमेह मेलीटस (Diabeties melitus)इन्सुलिन हार्मोन के कम स्राव के कारण
एड्रीसन रोग (Addison's disease)कोर्टिन हार्मोन के कम स्राव के कारण
बौनापन (Dwarfism)ग्रोथ हार्मोन के कम स्राव के कारण
एक्रोमेगली (Acromegaly)ग्रोथ हार्मोन के अधिक साव के कारण
मिक्जिर्डमा (Mystedema)थाइरॉक्सिन हार्मोन के काफी कम स्राव के कारण
ग्रेव रोग (Grave's disease)थाइरॉक्सिन हार्मोन के अति स्राव के कारण
महाकायता (Gigantism)पीयूष ग्रंथि की अग्र पालिका से एसटीएच (STH) हार्मोन का अधिक मात्रा में निषेचन
ग्वाइटर (Goiter) थाइरॉक्सिन हार्मोन की कमी के कारण
मधुमेह इन्सीपीड्स (Diabeties Insipidus)वेसोप्रेसिन हार्मोन की कमी के कारण
एक्सोप्थैलमिक ग्वाइटर (Exopthalmic Goiter)थाइरॉक्सिन हार्मोन के अधिक मात्रा में स्रवण के कारण
टिटेनी (Tetany)पैराथार्मोन के कम मात्रा में स्रवण के कारण
वाइरोलिज्म (Virolism)एड्रीनलिन के अधिक स्राव के कारण

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!