बकरी की नस्लें

बकरी की नस्लें

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  • अधिकतम उम्र: 15 – 18 वर्ष
  • गर्भ काल: 150 दिन
  • कुल: बोविडा (Bovida)
  • वैज्ञानिक नाम: कैप्रा एगैग्रस हिर्कस (Capra aegagrus hircus)

बकरी एक पालतू पशु है, जिसकी विश्वभर में 300 से अधिक नस्लें पायी जाती हैं। बकरियों को दूध, मांस, फर व खाल के लिए पाला जाता है।

उत्तर प्रदेश के मखदूम (मथुरा) में केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (Central Institute for Research on Goats – CIRG) स्थित है।

बकरी को गरीबों की कामधेनु के नाम से भी जाना जाता है।

बकरी के दूध में वसा (fat) के बहुत छोटे-छोटे कण पाए जाते है, जिस कारण यह आसानी से सुपाच्य (digestible) होता है।

बकरी के दूध में आयरन (iron), पोटैशियम (potassium) व लवण की प्रचुर मात्रा पायी जाती है। औषधीय गुणों के कारण बकरी के दूध को अलसर, तपेदिक (T.B), अतिसार, डेंगू आदि मरीजों के लिए अत्यधिक उपयोगी है।

पश्मीना (कश्मीर) बकरी की एक विश्व प्रसिद्ध प्रजाति है, जिसका उपयोग ऊन उत्पादन के लिए किया जाता है।

जमुनापारी बकरी की एक द्विकाजी नस्ल हैं, जो आकार में सबसे बड़ी है।

मोहेयर ऊन (Mohair wool), अंगोरा बकरी से प्राप्त किया जाता है, जिसका जन्म स्थान मध्य एशिया है।

  • Note: अंगोरा ऊन (Angora wool), खरगोश से प्राप्त किया जाता है।

सानेन बकरी को विश्व की दूध की रानी के नाम से जाना जाता है, जिसका जन्म स्थान स्विट्ज़रलैंड है।

उत्तरी शुष्क और हिमालयन क्षेत्र में भारत की सबसे अच्छी नस्ल की बकरियाँ पायी जाती है।

भारतीय बकरी की नस्लें 

भारतीय बकरी की नस्लें

  1. दूध हेतु उपयोग में लायी जाने वाली:  जमुनापारी, बरबरी, बीटल, झकराना
  2. मांस हेतु उपयोग में लायी जाने वाली:  ब्लैक बंगाल, सिरोही, कश्मीरी, मालावरी
  3. ऊन हेतु उपयोग में लायी जाने वाली:   पश्मीना, कश्मीरी, चेंगू
  4. खाल हेतु उपयोग में लायी जाने वाली:  ब्लैक बंगाल, मालावरी, बंगाली

विदेशी बकरी की नस्लें 

विदेशी बकरी की नस्लें

  1. दूध हेतु उपयोग में लायी जाने वाली: मातऊ, दमस्कस, साने, एंग्लो-न्बूबियन
  2. मांस हेतु उपयोग में लायी जाने वाली: बोइर
  3. ऊन हेतु उपयोग में लायी जाने वाली: अंगोरा
  4. खाल हेतु उपयोग में लायी जाने वाली: मराडी, अंगोरा

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