El Niño

मानसून की उत्पत्ति का एल नीनो (El Niño) सिद्धांत

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एल नीनो (El Niño) की उत्पत्ति लगभग 3 से 8 वर्षों के अंतराल में पूर्वी प्रशांत महासागर ( Eastern Pacific Ocean) के पेरू तट (Peru coast) से होती है। एलनिनो की उत्पत्ति के समय महासागरों तथा वायुमण्डल की सामान्य दशाओं में एक विशिष्ट परिवर्तन होता है। पेरू के तट  पर हमबोल्ट की जलधारा (ठण्डी जलधारा) प्रवाहित होती है, जो दक्षिण अमेरिकी तट (South American coast) से दूर उत्तर की ओर प्रवाहित होती है। विषुवत रेखा (equator line) के समीप यह जलधारा प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) के आर-पार पश्चिम की ओर मुड़ जाती है।

Note : हम्बोल्ट जलधारा की विशिष्टता  शीतल जल का गहराई से ऊपर की ओर आना (Upwelling) है।

एलनिनों की उत्पत्ति के समय पेरू के तट पर प्रवाहित होने वाली हमबोल्ट जलधारा (Humboldt stream) एक सूक्ष्म गर्म जलधारा में परिवर्तित हो जाती है, जो 25 दिसम्बर के आस-पास उत्पन्न होती है और वैश्विक जलवायु तंत्र (Global climate system) को प्रभावित करती है। 25 दिसम्बर के आस-पास उत्पन्न होने के कारण इस जलधारा को ईसा का शिशु के नाम से भी जाना जाता है।

एलनिनो की उत्पति के साथ ही ठण्डे जल का गहराई से ऊपर आना बंद हो जाता है एवं ठण्डे जल का स्थान पश्चिम से आने वाली जलधाराएं ले लेती है, जिसके कारण पेरू की जलधारा के  तापमान में वृद्धि हो जाती है।

इस गर्म जलधारा के प्रभाव के कारण सर्वप्रथम दक्षिणी विषुवतीय गर्म जलधारा (southern equatorial hot stream) के तापमान में वृद्धि हो जाती है, क्योकिं दक्षिणी विषुवतीय जलधारा (southern equatorial stream) पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित होती है।  जिसके कारण सम्पूर्ण मध्य प्रशांत महासागर (Central Pacific Ocean) के जल के तापमान में वृद्धि  हो जाती है तथा इस क्षेत्र में निम्न वायु दाब का निर्माण होता है, और जब इस निम्न वायु दाब का विस्तार हिन्द महासगर के पूर्वी मध्यवर्ती क्षेत्र में होता है तो इससे भारतीय मानसून पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।

मध्य प्रशांत महासागर (Central Pacific Ocean) के निम्न वायु दाब  तुलना में भारतीय उपमहाद्वीप के स्थलीय भाग में निम्न वायु दाब (ग्रीष्म ऋतु) तुलनात्मक रूप से कम होता) है। जिसके कारण अरब सागर (Arabian Sea) के उच्च दाब क्षेत्र से हवाएं दक्षिण-पूर्वी हिन्द महासागर (Southeast Indian Ocean) की ओर प्रवाहित होने लगती है। जिससे भारतीय उपमहाद्वीप (Indian subcontinent) क्षेत्र में सूखे (Droughts) की स्थिति उत्पन्न होती है।

इसके विपरीत जब एलनिनो धारा का प्रभाव मध्यवर्ती प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) तक सीमित रहता है, तो दक्षिण-पश्चिम मानसूनी (southwest monsoon) पवनों का मार्ग बाधित नहीं होता तथा भारत में भरपूर वर्षा होती है।


एलनिनो के परिणाम 

  1. भूमध्यरेखीय वायुमंडलीय परिसंचरण में विकृति (Deformation in equatorial atmospheric circulation)
  2. समुद्रीय जल के वाष्पन में अनियमितता (Irregularity in evaporation of sea water)
  3. प्लवक की मात्रा में कमी, जिससे समुद्र में मछलियों की संख्या में कमी (Reduction in plankton, thus reducing the number of fish in the sea)

ला निना (La nina)

एल नीनो (El Niño) के विपरीत ला निना (La nina) एक अति ठण्डी जलधारा है जो ध्रुवीय दिशा से विषुवत रेखा की ओर पेरू के तट (Peru coast) पर उत्पन्न होती है।

ला निना (La Niña) एक प्रतिसागरीय धारा (Counter Ocean current) है। जिसकी उत्पत्ति पश्चिमी प्रशान्त महासागर (Western Pacific Ocean) में उस समय होती है, जब पूर्वी प्रशान्त महासागर (Eastern Pacific Ocean) में एल नीनो (El Niño) का प्रभाव समाप्त हो जाता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, पश्चिमी प्रशांत महासागर (Western Pacific Ocean) में एल नीनो (El Niño) द्वारा उत्पन्न सूखे की स्थिति को ला निना (La Niña) परिवर्तित कर देता है तथा आर्द्र मौसम को जन्म देता है। ला निना (La Niña)  की उत्पत्ति के साथ ही पश्चिमी प्रशान्त महासागर (Western Pacific Ocean)  के उष्ण कटिबंधीय भाग में तापमान में वृद्धि से वाष्पीकरण भी अधिक होता है जिसके कारण भारतीय उपमहाद्वीप क्षेत्र में सामान्य से अधिक वर्षा होती है।

Note: वर्ष 1998 में ला निना (La Niña) के कारण सामान्य से अधिक वर्षा होने से चीन (China), भारत (India) तथा बांग्लादेश (Bangladesh) में प्रचण्ड बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी।

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