Daily current Affairs 6-7 feb 2018

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अग्नि-1 मिसाइल (Agni-I)

भारत ने मंगलवार (6-feb-2018 ) को परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम स्वदेशी अग्नि-1 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण ओडिशा तट के पास स्थित अब्दुल कलाम द्वीप (व्हीलर द्वीप) से  किया। यह सतह से सतह पर मार करने वाली परमाणु सक्षम मिसाइल है।

अग्नि-एक को एडवांस्ड सिस्टम्स लैबोरेटरी (ASL) ने रक्षा अनुसंधान विकास प्रयोगशाला (DRDL) और अनुसंधान केंद्र इमारत (RCI) के सहयोग से विकसित किया है। मिसाइल को भारत डायनामिक्स लिमिटेड, हैदराबाद ने समेकित किया है। ASL मिसाइल विकसित करने वाली डीआरडीओ की प्रमुख प्रयोगशाला है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • अग्नि-1 मिसाइल स्वदेशी तकनीक से विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली परमाणु मिसाइल है ।
  • यह ठोस इंजन आधारित मिसाइल तकनीक है।
  • अग्नि-1 मिसाइल मारक क्षमता 700 किलोमीटर।
  • 1000 किलोग्राम तक के परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम।
  • मिसाइल का वजन 12 टन और 15 मीटर लंबी है।
  • सशत्र बल में शामिल पहली एवं एकमात्र ठोस इंजन वाली मिसाइल।
  • लंबाई 15 मीटर इसे रेल एवं सड़क दोनों प्रकार के मोबाईल लॉन्चर से छोड़ा जा सकता है।

दुनिया का सबसे शक्तिशाली राकेट – फ़ॉल्कन हेवी (Falcon Heavy)

नासा के लिए अंतरिक्ष उपकरण बनाने वाली अमेरिका की कंपनी  Space-X  द्वारा फ़ॉल्कन हेवी (Falcon Heavy) नामक एक शक्तिशाली रॉकेट ने फ्लोरिडा स्थित अमरीकी अंतरिक्ष संस्था नासा के जॉन एफ़ कैनैडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी। यह पृथ्वी की ऑर्बिट से और मंगल की ऑर्बिट तक चक्कर लगाता रहेगा।

  • Falcon Heavy के टैंक में एक स्पोर्ट्स कार (टेस्ला) रखी गई है। टेस्ला अंतरिक्ष की कक्षा में पहुँचने वाली विश्व की पहली कार होगी।
  • Falcon Heavy को जॉन एफ़ कैनैडी स्पेस सेंटर के LC-39A प्लेटफ़ॉर्म से लॉन्च किया गया है इससे पूर्व यही से अपोलो मिशन भी लॉन्च किया गया था।
  • Space-X और टेस्ला दोनों कंपनियाँ अरबपति कारोबारी एलन मस्क की कंपनियाँ हैं।

प्रमुख विशेषताएँ

  • इस रॉकेट की लंबाई 70 मीटर है।
  • यह रॉकेट 230 फुट लंबा है, जिसमें लगभग एक लाख 40 हजार पाउंड का वजन अंतरिक्ष में भेजा जा सकता है।
  • इस स्पेस रॉकेट का कुल वजन 63.8 टन है, जो दो स्पेस शटल के वजन के बराबर है। इसमें 27 मर्लिन इंजन लगे हैं जो 3 फाल्कन 9 रोकेट के बराबर हैं।
  • जमीन से उठने पर ये 50 लाख पाउंड का थ्रस्ट पैदा करता है जो बोइंग 747 एयरक्राफ्ट के 18 प्लेन द्वारा मिलाकर पैदा करने वाले थ्रस्ट के बराबर है।

ग्रेविटेशनल माइक्रोलेंसिंग (Gravational Microlensing) 

  • अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने नासा के चंद्र एक्स-रे वेधशाला (Chandra X-ray Observatory) से प्राप्त डेटा का उपयोग करते हुए वैज्ञानिकों ने पहली बार मिल्की वे आकाशगंगा के बाहर ग्रहों की खोज की है, जो हमारे सौर मंडल का नहीं है और बाक़ी ग्रहों के मुक़ाबले काफ़ी छोटा भी है।
  • यह ग्रह एक ऐसे तारे की परिक्रमा कर रहा है जिसका ख़ुद का द्रव्यमान बहुत कम है, ऐसे में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का मानना है कि यह एक बेकार हो चुका ग्रह हो सकता है.
  • अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से भी कम द्रव्यमान के इस ग्रह के मिलने को नक्षत्रों की खोज  काफ़ी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैज्ञानिकों किसी ऐसी दूसरी दुनिया की खोज कर रहे हैं जहाँ जीवन संभव हो अमेरिका में ओक्लाहामा विश्वविद्यालय के शोधकर्त्ताओं ने चंद्रमा के द्रव्यमान से लेकर बृहस्पति के द्रव्यमान तक वाली एक्सट्रागैलेक्टिक (मिल्की वे आकाशगंगा से परें) आकाशगंगाओं में वस्तुओं का पता लगाने के लिये माइक्रोलेंसिंग तकनीक का उपयोग किया था।
  • Gravational Microlensing एक खगोलीय घटना है जो कि ग्रहों का पता लगाने के लिये गुरुत्वाकर्षण द्वारा वक्रित प्रकाश का उपयोग करती है।
  • यह आकाशगंगा 3.8 अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित है और अब तक की सर्वश्रेष्ठ दूरबीन से भी इसका अवलोकन संभव नहीं था किंतु माइक्रोलेंसिंग के कारण यह खोज संभव हो सकी है।

ट्रैपिस्ट-1 (Trappist)

खगोलविद वैज्ञानिकों द्वारा ट्रैपिस्ट-1 नामक लाल तारे का चक्कर लगाने वाले साथ ग्रहों पर पानी मिलने की संभावना व्यक्त की गई है। इन सात ग्रहों का आकार पृथ्वी के आकार के बराबर आँका जा रहा है। इन ग्रहों की दूरी 40 प्रकाश वर्ष बताई गई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इनमें से तीन ग्रह पर जीवन की संभावना है

ट्रैपिस्ट-1 – अत्याधिक शीतल वामन तारा

  • ट्रैपिस्ट-1 एक अधिक ठंडा और सूर्य से लाल और बृहस्पति ग्रह से थोडा बड़ा है।
  • ट्रैपिस्ट-1 एक अति शीतल वामन तारा (ultra-cool dwarf star) है, जो एक्वेरियस तारा समूह (Aquarius constellation) में अवस्थित है।
  • इनमे से दो ग्रहों की क्रमश: 1.5 और 2.4 दिन की कक्षीय अवधि है, और तीसरे ग्रह की 4.5 से 73 दिनों की कक्षीय अवधि है
  • यह कुंभ (जल कैरियर) के नक्षत्र में निहित है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • ये सभी ग्रह अपने मातृ तारे की काफी समीप से परिक्रमा करते है। सभी ग्रह तुलनात्मक रूप से बुध की कक्षा के अंदर समा जॉयेंगे। इन पर एक वर्ष केवल कुछ ही दिनों का होगा।
  • ट्रैपिस्ट-1 B इस तारामंडल का सबसे निकटतम ग्रह है। इसका वायुमंडल पृथ्वी से ज़्यादा घना है।
  • ट्रैपिस्ट-1 C का भी भीतरी भाग पथरीला है, लेकिन बाहरी वायुमंडल पृथ्वी की तुलना में कम सघन पाया गया है।
  • इस तारामंडल में ट्रैपिस्ट-1 D इस तारामंडल का सबसे हल्का ग्रह है।
  • ट्रैपिस्ट-1 E की विशेषताएँ बहुत हद तक पृथ्वी से मिलती-जुलती है।
  • इस तारामंडल में ट्रैपिस्ट-1 G & H सुदूर स्थित ग्रह है। इस कारण इसकी सतह के पूर्ण रूप से बर्फीली होने की संभावना है।
  • ट्रैपिस्ट-1 के समीप स्थित ग्रहों पर जलवाष्प तथा सुदूर स्थित ग्रहों पर बर्फ के रूप में पानी के मौजूद होने की आशंका है।
  • वैज्ञानिकों द्वारा इन सात ग्रहों पर पृथ्वी की तुलना में 250 गुना अधिक पानी मिलने की संभावना व्यक्त की गई है।

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