ग्लोबल वार्मिंग से समुद्र के रंग में परिवर्तन – MIT & WEF रिपोर्ट

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अमेरिका की Massachusetts Institute of Technology (MIT)  द्वारा किए गए अध्ययन तथा World Economic Forum (WEF) द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग (Global warming,) के कारण विश्व में समुद्र के पानी के रंग में परिवर्तन हो रहा है। इस रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग के कारण 21वीं सदी के अंत तक दुनिया के 50% से अधिक समुद्रों का रंग परिवर्तित हो जाएगा।

Massachusetts Institute of Technology (MIT) के प्रोफेसर स्टेफनी के अनुसार, उपोष्ण-कटिबंधीय (Subtropics) क्षेत्रों में स्थित समुद्र का रंग ‘गहरा नीला’ और ध्रुवीय क्षेत्रों में स्थित समुद्र का रंग ‘गहरा हरा’ हो जाएगा| हाल ही में यह रिपोर्ट ‘Nature’ पत्रिका में भी प्रकाशित हुई है।

प्रमुख तथ्य

MIT द्वारा किए गए रिसर्च के अनुसार पानी की सतह पर उगे फायटोप्लैंक्टन के कारण उसका रंग हरा होता है।

ध्रवीय क्षेत्रों में समुद्र के तापमान में वृद्धि होने से फायटोप्लैंक्टन की मात्रा गहराई तक बढ़ सकती है इसी प्रकार समुद्र का पानी नीला होने का कारण फायटोप्लैंक्टन की संख्या में कमी होना है।

फायटोप्लैंक्टन सूक्ष्म जीव होते हैं जो समुद्री जीवों के भोजन का काम करते हैं. इनकी संख्या कार्बन डाई ऑक्साइड, सूरज की रोशनी और पानी में मौजूद पोषक तत्वों के आधार पर बढ़ती है, जिसमें भारी कमी देखी गई है।

समुद्र की अम्लीयता में वृद्धि होने का प्रभाव फायटोप्लैंक्टन पर पड़ेगा, जिससे इनकी वृद्धि में कमी होने के कारण समुद्री जीवों के लिए भोजन का संकट उत्पन्न होगा।

प्रोफेसर स्टेफनी के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र में मौजूद छोटी शैवालों को कार्बन डाई ऑक्साइड अवशोषित करने में कठिनाई हो रही है।

इस रिपोर्ट के अनुसार ही समुद्र में पानी के तापमान में वृद्धि के कारण शार्क अपना मार्ग भटक रही हैं।

अध्ययन का आधार

अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं द्वारा ऐसा वैश्विक मॉडल विकसित किया गया जो सूक्ष्म पादपों या शैवाल की प्रजातियों की वृद्धि और उनके मध्य अंतर्संवाद की बारीकियों का अध्यनन करता है। इस मॉडल पर आधारित अध्यनन में यह पता चला कि  विभिन्न स्थानों पर प्रजातियों के सम्मिश्रण से दुनियाभर में तापमान में वृद्धि होगी तथा यह भी पता लगाया कि किस प्रकार सूक्ष्म पादप प्रकाश का अवशोषण तथा परावर्तन करते हैं। ग्लोबल वार्मिंग के कारण ही पादप समुदाय की संरचना पर असर पड़ने से महासागर का रंग भी बदलता है।

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