कावेरी वन्यजीव अभयारण्य

कावेरी वन्यजीव अभयारण्य (Cauvery Wildlife Sanctuary)

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कर्नाटक में कावेरी वन्यजीव अभयारण्य के पास जंगली हाथियों के विद्युतीकरण से मरने के कई मामले हाल ही में सामने आए हैं।

कावेरी वन्यजीव अभयारण्य

वन्यजीव और उसके पर्यावरण की रक्षा, प्रसार या विकास के उद्देश्य से 1987 में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत इसका गठन किया गया था।

कावेरी वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत कर्नाटक राज्य के चामराजनगर, रामनगर और मंड्या जिलों में आरक्षित वन हैं।

कावेरी नदी, इस अभयारण्य की सीमा बनाती है और इसे अपना नाम भी देती है।

कावेरी नदी विविध जलीय जीवों को संरक्षण प्रदान करती है, मगरमच्छ (वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची I में सूचीबद्ध), और हंपबैक माहसीर मछली (hump-backed Mahseer Fish) यहाँ की प्रमुख प्रजातियां है।


हंपबैक माहसीर मछली (hump-backed Mahseer Fish)

वैज्ञानिक नाम − तोर रिमादेवी

ये नदी के निर्दिष्ट हिस्सों में पाई जाने वाली बड़ी मीठे पानी की मछली हैं और इसे IUCN की लाल सूची (IUCN Red List) में गंभीर रूप से लुप्तप्राय होने की स्थिति है।

नोट: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम कहता है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी ‘जंगली जानवर’ का शिकार नहीं करेगा। भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के तहत मीठे पानी की अधिकांश मछलियों को ‘वन्यजीव’ की श्रेणी में शामिल किया गया है लेकिन ‘जंगली जानवर’ की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया है। इसलिए अधिनियम के तहत अधिकांश मछलियों की रक्षा नहीं की जाती है।

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