उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 17)

डा. भक्त दर्शन द्वारा रामतीर्थ स्मृति तथा सुमन स्मृति ग्रंथ की रचना की गयी थी। हेमवती नंदन बहुगुणा द्वारा इंडियन नाइस नामक पुस्तक की रचना की गयी थी। चंडी प्रसाद भट्ट द्वारा दाल्यो

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 16)

काली नदी कुमाऊं मंडल की सबसे बड़ी नदी है, जिसे नेपाल में शारदा नदी के नाम से जाना जाता है। काली नदी का उद्भव उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद में 3,600 मीटर की

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 15)

चंद वंश के शासक बाजबहादुर चंद  ने राजा के पद को दैवीय तथा खुद का नाम भी नारायण रखा था। चंद वंश के शासक इन्द्रचंद द्वारा कुमाऊं में रेशम का व्यापार स्थापित

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 14)

लाखु उडियार (LakhuUdiyar) अल्मोड़ा में सुयाल नदी के तट पर स्थित है। सुयाल नदी को प्राचीन काल में शाल्मली नदी के नाम से जाना जाता था। माता सुखरौ देवी का मंदिर उत्तराखंड

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 13)

इंडियन मेडिसिन फार्मास्युटिकल लिमिटेड (Indian Medicine Pharmaceutical Limited), मोहान (अल्मोड़ा) में स्थित है। ऐबट पर्वत (Abbott Mountains) उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित है।    उत्तराखंड में पाए जाने वाले रोज जिरेनियम

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 11)

चंद वंश का शासक मोहन चंद शासक दो बार कुमाऊं का शासक बना। खटीमा का प्राचीन नाम मकरपुर था। उत्तराखंड के पौड़ी-गढ़वाल जिले में प्रत्येक वर्ष संगलाकोटी मेला लगता है। अखिल तारणी

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 12)

उत्तराखंड राज्य पुलिस अकादमी, नरेंद्र नगर (टिहरी) में स्थित है। हिमालय दिवस (Himalayan Diwas) प्रत्येक वर्ष 9 सितम्बर को हिमाँचल प्रदेश और उत्तराखंड सरकार द्वारा हिमालय दिवस (Himalayan Diwas) के रूप में

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 10)

उत्तराखंड की भोटिया जनजाति का मुख्य रूप से भेड़पालन का कार्य करती है। भोटिया जनजाति की उप जातियाँ भोटिया, जाड़, मारछा व तोलछा है। 17 November 1960 को जीबी पंत कृषि एवं

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 9)

रानी कर्णावती द्वारा करनपुर गाँव (देहरादून) में बसाया गया था। अबू-फ़ज़ल इब्न मुबारक द्वारा लिखित आइन-ए-अकबरी (Ain-i-Akbari) में कुमाऊं प्रान्त को को दिल्ली सूबे के अंतर्गत दर्शाया गया है। खंलगा दुर्ग उत्तराखंड

गोरखा शासनकाल के प्रमुख कर

सलामी कर – यह अधिकारियों को भेंट स्वरुप दिया जाने वाला कर था। सौण्या फाल्गुन कर – यह कर त्योहारों व उत्सवों पर भेंट के रूप में लिया जाता था। खान व

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