उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 38)

अल्मोड़ा अखबार का प्रथम संपादक बुद्धि बल्लभ जोशी थे। कत्यूरी वंश में ग्राम शासक को पाल्लिका कहा जाता था। गोरखा शासको के शासनकाल में दास मंडी, हरिद्वार जिले के भीमगोड़ा नामक स्थान

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 37)

चंद कालीन सबसे पुराना अभिलेख थोहरचंद का प्राप्त हुआ है। चंद वंश के शासक भारतीचंद ने 12 वर्षों तक डोटियों से युद्ध किया था। चंद वंश के शासक कल्याण चंद द्वारा गंगोलीहाट

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 36)

पंतनगर  विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति डा. केनेथ एंथनी पार्कर स्टीवेंसन (Dr. Kenneth Anthony Parker Stevenson) थे। वर्ष 1948 में कुमाऊं रेजीमेंट का मुख्यालय आगरा में रानीखेत में स्थानांतरित किया गया था। कोटलीभेल

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 35)

अन्नापूर्णा नौटियाल को गढ़वाल विश्वविधालय की पहली महिला कुलपति नियुक्त किया गया था। “कोटली बुग्याल” टिहरी जिले में “पांडव चोटी” के समीप स्थित है। कोटली बुग्याल को अप्सराओं का बुग्याल के नाम

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 34)

झूठा मंदिर, कुमाऊं मंडल में चंपावत जिले के प्रवेश द्वार टनकपुर में स्थित है। यह मंदिर मां पूर्णागिरि मंदिर से 1 K.M पहले स्थित है। टनकपुर को मिस्टर टलक द्वारा बसाया गया था। झूला देवी

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 33)

कालसी, देहरादून में यमुना और टोंस नदी के संगम पर स्थित है, जहाँ पर सम्राट अशोक का 13 वां शिलालेख स्थित है। कालसी को कालकूट के नाम से भी जाना जाता है।

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 32)

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित वरूणावत पर्वत पर प्रथम बार भूस्खलन वर्ष 2003 में हुआ था। वरूणावत पर्वत पर आयी दरार के बारे में वर्ष 1803 में पता चला था। असी

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 31)

मोहन खाल तांबे की खान उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित है। हिन्दी कवि नागार्जुन, उत्तराखंड के जहरीखाल (पौड़ी) नामक स्थान से संबंधित है। बद्रीनाथ धाम को नरहरि तीर्थ के नाम से

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 30)

सलाणी बोली उत्तराखंड के पौड़ी जिले में बोली जाती है। धनपुरिया बोली उत्तराखंड के चमोली जिले में बोली जाती है। बिसोई ग्राम (जौनसार) के प्रथम समाज सेवी केदार सिंह थे। पंच बदरी

उत्तराखंड से संबंधित प्रमुख तथ्य (Part 29)

चंद वंश के राजा जगतचंद के शासनकाल को कुमाऊं का स्वर्णकाल कहा जाता है। चंदवंशीय राजकुमार “गंगनाथ” को अल्मोड़ा में घर-घर में पूजा जाता है। एटकिंसन के अनुसार अशोकचल्ल के गोपेश्वर त्रिशूल

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