संवैधानिक उपचारों का अधिकार रिटो के माध्यम से : अनुच्छेद (32)

संवैधानिक उपचारों का अधिकार वह साधन है , जिसके द्वारा मौलिक अधिकारों का हनन होने पर इसकी रक्षा उच्चतम न्यायालय (SC) व उच्च  न्यायालय (HC) द्वारा की जा सकती है। इन अधिकारों का हनन होने पर उच्चतम न्यायालय (SC) अनु० – 32 व उच्च  न्यायालय

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संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार : अनुच्छेद (29-30)

अनुच्छेद (29) – अल्पसंख्यकों के हितो का संरक्षण संविधान में अल्पसंख्यकों के हितो के संरक्षण के दो आधार बताए गए है। धार्मिक (Religious) भाषायी (Linguistic) अल्पसंख्यकों के हितो के संरक्षण के अंतर्गत निम्न प्रावधान किए गए है — इसके तहत यह प्रावधान किया गया है

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 धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार : अनुच्छेद (25-28)

अनुच्छेद (25) – अंत:करण , धर्म के आचरण की स्वतंत्रता और धर्म का प्रचार – प्रसार करने की स्वतंत्रता  इसके अंतर्गत अंत:करण की स्वतंत्रता निहित है। जिसके तहत व्यक्ति ईश्वर के किसी भी रूप को मान सकता है , इसका प्रचार व प्रसार कर सकता

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शोषण के विरुद्ध अधिकार : अनुच्छेद (23-24)

अनु० 23 – मानव दुर्व्यापार एवं बाल श्रम का निषेध  अनु० 23 मानव के दुर्व्यापार , बेगार और सभी प्रकार के बाल श्रम को निषेध करता है। यह अधिकार नागरिक और गैर-नागरिक दोनों के लिए उपलब्ध है। मानव दुर्व्यापार (Human Miserable) – पुरुष , महिला , बच्चो के

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स्वतंत्रता का अधिकार : अनुच्छेद (19-22)

अनुच्छेद (19-22) के अंतर्गत सभी नागरिको के स्वतंत्रता के अधिकारों की व्याख्या की गई है।  जो निम्न है – अनुच्छेद (19) – यह 6 अधिकारों की रक्षा प्रदान करता है – (A) – वाक् व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अमेरिका के संविधान की तरह भारत में

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समता का अधिकार : अनुच्छेद (14-18)

अनुच्छेद (14) – विधि के समक्ष समता और विधियों का सामान संरक्षण  अनुच्छेद 14 के अंतर्गत यह व्यवस्था की गई है कि भारत के किसी भी राज्यक्षेत्र किसी भी व्यक्ति (विदेशी या भारतीय नागरिक) को विधि के समक्ष समता से या विधियों समान संरक्षण से

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मूल अधिकार (Fundamental Rights)

संविधान में मूल अधिकारों (Fundamental Rights) का उल्लेख अनु० (12-35) के मध्य किया गया है। मूल अधिकार वें अधिकार है जिनका  हनन होने पर राज्य सरकार इन्हें दिलाने को बाध्य है ऐसा न होने पर व्यक्ति सीधे उच्चतम व उच्च न्यायालयों (Supreme Court or High Court) जा सकते है ।

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भाग II : नागरिकता : (अनुच्छेद 5-11)

भारत के संविधान के भाग II (अनुच्छेद /Article 5-11) भारत की नागरिकता से संबंधित है। संविधान (26 नवंबर, 1949) के प्रारंभ में अनुच्छेद 5 भारत की नागरिकता के बारे में  है। अनुच्छेद 11 ने कानून द्वारा नागरिकता के अधिकार को नियंत्रित करने के लिए भारत

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भारतीय राज्य पुनर्गठन आयोग

स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत में 549 रियासते भारत में शामिल हो गयी आयर बची हुई तीन रियासत (हैदराबाद , जूनागढ़ और जम्मू -कश्मीर) भारत में शामिल होने से मन कर दिया , लेकिन बाद में निम्न तरीको से इन्हें भारत में मिला लिया गया

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संघ एवं उसका राज्य क्षेत्र अनुच्छेद (1-4)

अनुच्छेद 1 –  राज्यों का संघ इंडिया अर्थात भारत राज्यों का समूह न होकर राज्यों का संघ होगा। इसके अंतर्गत दो बातो का उल्लेख किया गया है – देश का नाम देश की राजपद्धति राज्यों के संघ को महत्व देने के कारण   भारतीय संघ राज्यों के बीच 

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