राज्य विधान परिषद्  (State Legislative Council)

संविधान के भाग – 6 में अनु० – 168 से 212 तक विधानमंडल की संगठन , कार्यकाल , शक्तियां व विशेषाधिकार आदि का वर्णन किया गया है । अनु०- 168 के अंतर्गत प्रत्येक राज्य के लिए एक विधानमंडल का प्रावधान किया गया है , जिसमे

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मुख्यमंत्री (Cheif Minister)

भारतीय संसदीय व्यवस्था में राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है, किंतु वास्तविक शक्तियां मुख्यमंत्री में निर्मित मंत्रीपरिषद् में होती है। मुख्यमंत्री की नियुक्ति  अनु० – 164 के अंतर्गत राज्यपाल सदन में बहुमत दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करेगा , किंतु सदन में किसी

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राज्यपाल की शक्तियां (Governors Powers)

राज्यपाल को राष्ट्रपति के समान ही कार्यकारी , विधायी , वित्तीय व न्यायिक शक्तियां प्राप्त है , किंतु राज्यपाल को राष्ट्रपति के समान ही सैन्य व आपातकालीन शक्तियां प्राप्त नहीं है। कार्यकारी शक्तियां (Executive powers) राज्य सरकार के सभी शासन संबंधी कार्य राज्यपाल के नाम

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राज्यपाल की नियुक्ति (Appointment of Governor)

संविधान के भाग-6 के अंतर्गत अनु० – 153 से 167 तक राज्य कार्यपालिका का वर्णन किया गया है। राज्य कार्यपालिका में मुख्यत: – राज्यपाल , मुख्यमंत्री ,  मंत्रिपरिषद  व राज्य का महाधिवक्ता शामिल होते है। राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है व राज्यपाल केंद्र सरकार

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संसदीय समितियां (Parliamentary committees)

संसद एक वृहद निकाय है जो अपने समक्ष लाए गए विषयों पर प्रभावी रूप से विचार करती है तथा इसके कार्य भी अत्यंत जटिल है , अत: पर्याप्त समय व विशेषज्ञता के आभाव में संसद अपने वैधानिक उपायों व अन्य मामलों की जाँच विभिन्न संसदीय

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संसद में बजट (Budget in parliament)

संविधान के अनु० – 112 के अंतर्गत प्रत्येक वित्त वर्ष के संदर्भ में मंत्री द्वारा भारत सरकार की अनुमानित प्राप्तियों एवं व्यय का विवरण संसद के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है जिसे वार्षिक वित्तीय विवरण या बजट (Budget) कहते है। बजट में सरकार की प्राप्तियों को

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संसद का संयुक्त सत्र (लोकसभा और राज्यसभा )

संविधान के अनु०- 108 के अंतर्गत संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की संयुक्त बैठक की व्यवस्था की गई है। इसके अंतर्गत किसी विधेयक पर गतिरोध उत्पन्न होने की स्थिति में राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है या विधेयक को दूसरे सदन

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संसद में विधायी प्रक्रिया

संसद में पेश होने वाले विधेयकों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है। सरकारी विधेयक गैर-सरकारी विधेयक साधारण विधेयक (Ordinary bill) अनु० – 107 के अनुसार साधारण विधेयकों को किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है , इसके अंतर्गत वितीय विषयों

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संसदीय कार्यप्रणाली (Parliamentary Functioning)

अनु० – 118  के अंतर्गत संसद का प्रत्येक सदन अपनी प्रकृया और कार्यप्रणाली के लिए नियम बना सकता है , इसके अंतर्गत प्रश्न पूछने की विधि , विधिक प्रस्ताव व चर्चाएँ आदि आते है । प्रश्न काल  संसद का पहला घंटा 11-12 a.m प्रश्नकाल के लिए

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संसदीय सत्र (Session of Parliament)

अनु० – 85 के अनुसार राष्ट्रपति दोनों सदनों को ऐसे अन्तराल पर आहूत करेगा की एक सत्र की अंतिम बैठक व अगले सत्र की प्रथम बैठक के मध्य 6 माह से अधिक का अंतराल ना हो।  एक वर्ष में सामान्यत: तीन सत्र होते है —

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