वित्त आयोग (Finance Commission)

वित्त आयोग का गठन संविधान के अनु० – 280 के अंतर्गत किया गया है , यह एक अर्द्ध – न्यायिक निकाय है जिसका गठन प्रत्येक 5 वर्ष के अंतराल में या आवश्यकतानुसार उनसे पूर्व भी किया जा सकता है | संरचना  वित्त आयोग के अध्यक्ष

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राज्य लोक सेवा आयोग – (State PSC)

राज्य लोक सेवा आयोग एक स्वतंत्र व संवैधानिक निकाय (Constitutional Body) है | इसका उल्लेख संविधान के भाग – 14 में अनु० – 315 से 323 के मध्य  इसकी स्वतंत्रता, कार्य, व शक्तियों आदि का वर्णन  किया गया है | संरचना  राज्य लोक सेवा आयोग (State

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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)

संघ लोक सेवा आयोग एक स्वतंत्र व संवैधानिक निकाय (Constitutional Body) है | इसका उल्लेख संविधान के भाग – 14 में अनु० – 315 से 323 के मध्य  इसकी स्वतंत्रता, कार्य, व शक्तियों आदि का वर्णन  किया गया है | संरचना  संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के

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निर्वाचन आयोग (Election Commission)

निर्वाचन आयोग (Election Commission) एक स्वतंत्र अखिल भारतीय संस्था व संवैधानिक  निकाय (Constitutional Body) है | जिसका  उद्देश्य देश में स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराना है  , संविधान के अनु० – 324 के अंतर्गत संसद , राज्य विधानमंडल , राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति के चुनाव निर्वाचन आयोग के कार्यक्षेत्र

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पंचायत और नगर निगमों के लिए योजना समिति

जिला योजना समिति (District Planning Committee) प्रत्येक राज्य जिला स्तर पर एक योजना समिति (Planning committee) का गठन करेगा , जो जिले के संबंध में पंचायतों और नगरपालिका द्वारा तैयार योजना के आधार पर जिला स्तर पर विकास योजना का प्रारूप तैयार करेगी तथा इस

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नगरीय शासन के प्रकार

भारत में निम्न आठ प्रकार के स्थानीय निकाय नगर क्षेत्रों के प्रकाशन के लिए सृजित किये गए है – नगरपालिका नगर निगम अधिसूचित क्षेत्र समिति नगरीय क्षेत्र समिति छावनी बोर्ड नगरीय क्षेत्र बंदरगाह (न्यास पत्तन)  विशेष उद्देश्य हेतु अभिकरण नगर निगम – नगर निगम का निर्माण

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नगरपालिका (Municipality)

भारत में नगरीय शासन प्रणाली को 74 वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अपनाया गया  | संघ स्तर पर नगरीय शासन प्रणाली का विषय निम्न 3 मंत्रालयों से संबंधित है – नगर विकास मंत्रालय (Ministry of urban development) रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) गृह मंत्रालय (Home

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पंचायती राज – (73 वें संविधान संसोधन अधिनियम 1992)

पंचायती चुनावों का संवैधानीकरण  राजीव गाँधी सरकार – पंचायतों को संवैधानिक मान्यता दिलाने हेतु वर्ष 1989 में सरकार द्वारा विधेयक संसद में पेश किया गया जो लोकसभा में तो पारित हो गया किंतु राज्यसभा में पारित नहीं हो सका , क्योकिं  इसमें केंद्र   को मजबूत

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पंचायती राज का विकास

भारत में पंचायतों का गठन गांधीजी की संकल्पना पर आधारित है जिसमें उन्होंने राज्य में सबसे निचले स्तर पर न्याय उपलब्ध कराने के लिए त्रिस्तरीय पंचायतों के गठन की बात कही थी| बलवंत राय मेहता समिति  वर्ष 1957 में भारत  सरकार द्वारा बलवंत राय मेहता

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केंद्र व राज्य के मध्य संबंधो की समीक्षा के लिए प्रशासनिक सुधार आयोग

भारत में केंद्र तथा राज्य संबंधो की समीक्षा एवं  सहकारी संघवाद को क्रियान्वित करने के लिए समय – समय पर विभिन्न समिति व आयोगों का गठन किया गया , जिनमे से निम्न महत्वपूर्ण आयोग है – प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग  केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 1966

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