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भारत का संवैधानिक इतिहास (Constitutional History of India)

• कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायलय की स्थापना रेग्युलेटिंग एक्ट 1773 के अंतर्गत की गई ! • कलकत्ता सर्वोच्च न्यायलय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे थे ! • भारत में कंपनी

भारत में संविधान का विकास (1773 – 1853 A.D)

रेग्युलेटिंग एक्ट (Regulating Act) 1773 इस अधिनियम के द्वारा भारत में पहली बार कंपनी के कार्यों को नियमित व नियंत्रित किया गया। इसके द्वारा भारत में केंद्रीय प्रशासन की नींव रखी गयी तथा

भारत में चुनाव सुधार (Election Reforms in India)

1996 के पहले चुनाव सुधार  मतदान की आयु को कम करना – 61 वें संविधान संसोधन अधिनियम 1988 के अंतर्गत मत देने की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी

दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law)

भारतीय संविधान में 52 वें संविधान संसोधन अधिनियम 1985 के द्वारा सांसदों तथा विधायकों के एक दल से दूसरे दल में परिवर्तन की स्थिति में उन्हें संसद अथवा विधानमंडल में अयोग्यता हेतु

अधिकरण (Tribunal’s)

भारतीय संविधान में 42 वें संविधान संसोधन अधिनियम – 1976 के अंतर्गत एक नया भाग – 14A अधिकरण जोड़ा गया | जिसके अंतर्गत दो अनु० है – अनु०- 323 A (प्रशासनिक अधिकरण) अनु० –

राजभाषा (Official Langauge)

भारतीय संविधान के भाग – 17 के अंतर्गत अनु० – 343 से 351 तक राजभाषा से संबंधित है , जिसे 4 भागों में विभाजित किया गया है — संघ की भाषा क्षेत्रीय

लोकपाल एवं लोकायुक्त

विश्व के विभिन्न देशों ने भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए निम्नलिखित संस्थाएं सृजित की है – Ombudsmen प्रणाली प्रशासनिक न्यायालय प्रणाली Proqurator प्रणाली Parliamentary Commission of Investigation विश्व में कुशासन व

केंद्रीय व राज्य सूचना आयोग

केंद्रीय व राज्य सूचना आयोग (Central and state information commission) एक सांविधिक निकाय (Statutory body) है , जिसकी स्थापना वर्ष 2005 में सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI – Right to Information) के अंतर्गत

केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central vigilance commission)

संसद द्वारा बनाई गयी संथानम समिति (1962-64) की सिफ़ारिशों के आधार पर भ्रष्टाचार (Corruption) को रोकने के लिए वर्ष 1964 में केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central vigilance commission) का गठन किया गया | मूलत: यह

राज्य मानवाधिकार आयोग (State Human Rights Commission)

राज्य मानवाधिकार आयोग (State Human Rights Commission) एक गैर – संवैधानिक (Non Constitunioal) किंतु सांविधिक निकाय (Statutory body) निकाय है , जिसका गठन  संसद द्वारा पारित मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम (1993) के द्वारा

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