पौधों के विभिन्न भाग (Different Parts of the Plants)

पौधों को मुख्य रूप से तीन भागो में बाटा गया है- जड़, तना तथा  पत्ती। 1. जड़ (Root): जड़ें प्रकाश के विपरीत गति करती हैं। जड़ें जमीन से जल व पोषक तत्वों का अवशोषण करती है। सामान्यतः जड़ दो प्रकार की होती है – मूसला

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ऊतक (Tissue)

Biology: Tissue कोशिकाओं का वह समूह, जिनकी उत्पत्ति, संरचना एवं कार्य समान हों, “ऊतक’ (Tissue) कहलाता है। ऊतकों का अध्ययन हिस्टोलॉजी (Histology) या औतकीय कहलाता है। ऊतको को दो भागो में बाटा गया है जन्तु ऊतक वनस्पति ऊतक जन्तु-ऊतक (ANIMAL TISSUE): जन्तु ऊतक 5 प्रकार के होते हैं- (i)

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प्रोटोजोआ जनित रोग (Protozoan disease)

प्रोटोजोआ (Protozoa) एक एकल-कोशिका वाला जीव है जो एक यूकेरियोट है (जो ऐसे जीव हैं जिनकी कोशिकाओं में झिल्ली-बंधे हुए जीव और नाभिक होते हैं)। यूकेरियोट्स में, अन्य जानवर और पौधे भी शामिल हैं। यूकेरियोट्स में सूक्ष्मजीव भी शामिल हैं जैसे – शैवाल, हेल्मिन्थ्स, और

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कोरोना वायरस (COVID – 19) (सावधान रहें, भयभीत न हों)

COVID-19 एक संक्रामक रोग है, जो हाल ही में खोजे गए नोवेल कोरोना वायरस के कारण होता है। यह कैसे संचारित (फैलता) होता है? जब COVID-19 बीमारी से पीड़ित व्यक्ति छींकता है या खांसी करता है, तो बहुत सारी बूंदें हवा में फैल जाती हैं या

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हॉर्मोन्स और इसके प्रभाव (Hormones & its effects)

हार्मोन/ग्रन्थिरस एक जटिल कार्बनिक पदार्थ हैं, जो जीवित जीवों में होने वाले विभिन्न जैव रासायनिक कार्यों, वृद्धि और विकास, प्रजनन आदि को नियमन और नियंत्रण करते है। हार्मोन कोशिकाओं (cells) और ग्रंथियों (glands) से स्रावित होते हैं।

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मानव रोग (Human disease, Part – II)

फाइलेरिया (Filaria) – यह रोग अनेक प्रकार के सूत्रकृमियों के कारण होता है। इस रोग से लसीका वाहिनियां (Lymph Vessels) और ग्रन्थियां (Glands) फूल जाती हैं। मलेरिया की भांति इस रोग के आरम्भ में भी ज्वर आ जाता है। स्कर्वी (Scurvy) – विटामिन C एस्कॉर्बिक

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मानव रोग (Human disease, Part – I)

सामान्यतः कहा जाता है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करत है। किन्तु अच्छे स्वास्थ्य में व्यवधान उत्पन्न होना ही रोग (Diseases) है। मानव शरीर में विभिन्न विकारों को उनकी प्रकृति व कारण के आधार पर विभाजित किया गया है। जैसे उपापचयी या

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मानव नेत्र (Human eye)

नेत्र एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण ज्ञानेंद्रिय है। यह हमारा नेत्र ही है जो हमें अपने चारों ओर फैली रंगीन दुनिया को देखने में सक्षम बनाती है। नेत्र कार्य एक कैमरे के कार्य जैसा होता है। आंख के बाहरी भाग (Outer part of the eye) केंद्रीय

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रुधिर वाहिकाएं/नलिकाएं (Blood Vessels)

यद्यपि हृदय परिसंचरण तंत्र का केन्द्रीय भाग है लेकिन पूरे शरीर में रक्त का संचारण रक्तवाहिनियों के द्वारा ही होता है। रक्त वाहिनिया निम्न प्रकार की होती हैं: महाधमनी (Aorta) और धमनियां (Arteries) धमनिकाएं (Arterioles) कोशिकाएं (Capillaries) शिरिकाएं (Venules) शिराएं और महाशिराएं (Veins & Vena

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परिसंचरण तंत्र (Circulatory System)

सभी छोटे-बड़े जंतुओं के शरीर के भीतर ऑक्सीजन, भोजन, हॉर्मोन्स आदि पदार्थों को आवश्यकतानुसार उपयुक्त अंगों में पहुंचाने के लिए एक सुविकसित परिसंचारी तंत्र होता हैं, जिसे परिसंचरण तंत्र (Circulatory System) कहते हैं। परिसंचरण तंत्र वाहनियों और नलियों के जाल द्वारा बना होता है। परिसंचारी

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