कर्नाटक संगीत (Carnatic music)

हाल ही में, S सौम्या को कर्नाटक संगीत के लिए संगीता कलानिधि पुरस्कार (Sangeeta Kalanidhi Award) से सम्मानित किया गया। भारतीय शास्त्रीय संगीत को मुख्यत: दो भागो में विभाजित किया गया है

कला कुंभ (Kala Kumbh)

कपड़ा मंत्रालय द्वारा 14 से 23 फरवरी, 2020 तक देश के विभिन्न हिस्सों में कला कुंभ – हस्तशिल्प प्रदर्शनी (Kala Kumbh – Handicraft Exhibition) का आयोजन किया जा रहा है। प्रमुख बिंदु

भैंसों की परंपरागत दौड़ – कम्बाला (Kambala)

भैंसों की परंपरागत दौड़ कम्बाला (Kambala) में विजयी श्रीनिवास गौड़ा की तुलना विश्व रिकॉर्ड धारक उसेन बोल्ट (Usain Bolt) से की गयी, क्योंकि उन्होंने भैंसों की परंपरागत दौड़ कम्बाला (Kambala) में 100

कोणार्क सूर्य मंदिर, संरक्षण योजना (Konark Sun Temple, Conservation Plan)

केंद्र सरकार ने लगभग 800 वर्षीय पुराने कोणार्क सूर्य मंदिर, ओडिशा को पुनर्स्थापित और संरक्षित करने का निर्णय लिया है। पूर्व में किये गए संरक्षण के प्रयास इससे पूर्व वर्ष 1903 में

नागोबा जतारा उत्सव (Nagoba Jatara festival)

तेलंगाना में एक माह का नागोबा जात्रा उत्सव समाप्त हो गया है। नागोबा जात्रा एक आदिवासी त्यौहार है जो केसलापुर गांव, इंद्रवेल्ली मंडल आदिलाबाद जिले, तेलंगाना में आयोजित किया जाता है।  इस

भारत पर्व 2020

नई दिल्ली में 26 से 31 जनवरी, 2020 तक वार्षिक कार्यक्रम भारत पर्व मनाया जा रहा है। उद्देश्य: भारतीयों को भारत के विभिन्न पर्यटन स्थलों की यात्रा के लिए प्रोत्साहित करना और 

कथक (Kathak)

कथक, भारत के शास्त्रीय नृत्यों में से एक है। कथक शब्द की उत्पत्ति कथ शब्द से हुई है जिसका अर्थ है एक कहानी। यह नृत्य मुख्य रूप से उत्तरी भारत में किया

जल्लीकट्टू महोत्सव (Jallikattu Festival)

वर्ष 2020 में पोंगल त्यौहार (Pongal festival) के अवसर पर तमिलनाडु में आयोजित तीन जल्लीकट्टू आयोजनों में 100 से अधिक लोग घायल हुए। जल्लीकट्टू एक पारंपरिक बुल-टेमिंग इवेंट (Bull taming event) है

भारत में हार्वेस्ट फेस्टिवल (Harvest Festivals in India)

लोहड़ी, मकर संक्रांति, हरेला और पोंगल जैसे सभी त्‍यौहार फसलों पर आधारित है जो प्रत्येक वर्ष पूरे देश में मनाए जाते है। इन त्‍यौहार पर देश भर के लाखों किसानों की मेहनत

गौतम बुद्ध की दूसरी सबसे ऊँची प्रतिमा

महात्मा गौतम बुद्ध की विश्व की दूसरी सबसे ऊंची मूर्ति देव नी मोरी, साबरकांठा जिले, गुजरात (Dev Ni Mori, Sabarkantha district, Gujarat) में बनाने का प्रस्ताव है। यह प्रस्तावित प्रतिमा (108 meter)