प्राचीन भारतीय इतिहास के पुरातात्विक स्त्रोत

प्राचीन भारतीय इतिहास को जानने के लिए पुरातात्विक स्रोतों के अंतर्गत अभिलेख, सिक्के, मूर्तियां, चित्रकला, मृदभांड एवं मोहरें आते है। अभिलेख  अभिलेखों के अध्ययन को पुरालेखशास्त्र (Epigraphy) अथवा पुरालिपि शास्त्र कहते हैं। सामान्यत: अभिलेखों को स्तंभों, शिलाओं, गुफाओं, मूर्तियों आदि पर उत्कीर्ण करवाए जाते थे।

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प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Era)

वह काल जिसमें मानव किसी भी प्रकार की लिपि (Script) अथवा लेखन कला से परिचित नहीं था, उसे प्रागैतिहासिक काल व प्रस्तर युग (पाषाण काल) के नाम से भी जाना जाता है। प्रागैतिहासिक काल के अंतर्गत मानव उत्पत्ति से लेकर लगभग 3000 ई.पू. के मध्य का समय आता है। पाषाण काल एवं ताम्र पाषाण काल का

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इतिहास के अध्ययन हेतु कालखंडो का विभाजन

इतिहास के अध्ययन हेतु इसे मुख्यत: 3 भागों में विभाजित किया जा सकता है – प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Era) आद्यैतिहासिक काल ऐतिहासिक काल प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Era) वह काल जिसमें मानव किसी भी प्रकार की लिपि (Script) अथवा लेखन कला से परिचित नहीं था, उसे प्रागैतिहासिक काल

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