बिलासपुर जिला (Bilaspur District)

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गठन – 1 जुलाई, 1954
मुख्यालय- बिलासपुर
भाषा – हिंदी, पंजाबी, कहलूरी

bilaspur district
Image Source: onefivenine.com

बिलासपुर हिमाचल प्रदेश का एक जिला है यहा, सतलज नदी पर मानव निर्मित गोविंद सागर झील है जो भाखड़ा और नंगल बांध परियोजना के लिए जलाशय के रूप में कार्य करती है। बिलासपुर भारत की आजादी के पश्चात एक अलग राज्य के रूप में स्थापित रहा, जिसे कि 1 जुलाई, 1954 को भारतीय संसद के एक एक्ट द्वारा हिमाचल का पांचवां ज़िला बनाया गया। सिख गुरू श्री तेग बहादुर सिंह जी ने बिलासपुर का भ्रमण किया तथा नानकी गांव की स्थापना की। प्रसिद्ध साहित्यकार राहुल सांस्कृत्यायन ने 1957 में बिलासपुर का भ्रमण किया।

शुरू में बिलासपुर की दो तहसीलें घुमारवीं और बिलासपुर सदर थीं। जनवरी, 1980 में अलग उप तहसील नयनादेवी बनाई गई जिसका मुख्यालय स्वारघाट था। 1984 में एक और उपतहसील झण्डूता, घुमारवीं तहसील से बनाई गई। इसे पूर्ण तहसील का दर्जा 1998 में दिया गया। प्रशासनिक दृष्टि से जिला दो उपखण्डों,  तीन तहसीलों, 1 उपतहसील, 3 सामुदायिक विकास ब्लॉक, 136 पंचायतों, 2 नगरपालिका तथा 2 अधिसूचित क्षेत्र कमेटी में बंटा हैं

जनसांख्यिकी (Demographics):

जनसांख्यिकी 2011 के अनुसार-

  • क्षेत्रफल (Area): 1,167 वर्ग कि०मी०
  • जनसँख्या (Population): 3,81,956
  • पुरुष (Men- जनगणना2011 के अनुसार):1,92,764
  • महिलाएं (Women- जनगणना2011 के अनुसार):1,89,192
  • लिंग अनुपात (Sex Ratio)(प्रति 1000): 981 
  • साक्षरता (Literacy): 85.67% (92.39% male), (78.90% female)
  • उप मंडल (Sub division): 4 (बिलासपुर, घुमारवीं, झंडुता, स्वारघाट स्थित श्री नैना देवी जी)
  • तहसीलें & उप तहसीलें (Tahsils & Sub-Tehsils): 7 (बिलासपुर, घुमारवीं, झंडुता, स्वरघाट ऐट श्री नैना देवी जी, भराडी, नमहोल, कलोल)
  • पंचायत (Panchyat): 136

बिलासपुर जिले के चश्मे (water glasses in Bilaspur District):

  • बस्सी और लुण्ड

बिलासपुर जिले के वन्य जीव अभ्यारण्य (wildlife Sanctuary in Bilaspur District):

  • गोविन्द सागर वन्य जीव अभ्यारण्य (100 वर्ग किलोमीटर)-  5 दिसम्बर 1962 को गठित
  • नैना देवी वन्य जीव अभ्यारण्य (123 वर्ग किलोमीटर)- 5 दिसम्बर 1962 को गठित

बिलासपुर जिले की घाटियां एवं पर्वत श्रृंखलाएं (Mountain ranges and Valleys in Bilaspur District):

  • नयना देवी धार(ऊंचाई 1100 meter)- माँ नयना देवी का मंदिर, कोट कहलूर का किला, फतेहपुर का किला स्थित है।
  • कोट धार पर्वत श्रृंखला
  • जाझियार पर्वत श्रृंखला
  • त्यूं धार पर्वत श्रृंखला
  • बंदला धारपर्वत श्रृंखला
  • बहादुरपुर धार पर्वत श्रृंखला
  • रत्नपुर धार-  इसी धार पर रत्नपूर किला स्थितहै। इसी किले को आधार बनाकर गोरखा कमांडर अमर सिंह थापा को हराया था।
  • सतलुज घाटी-  कसोल कस्बे से बिलासपुर में प्रवेश करती है, और नैला गावं से बिलासपुर को छोड़ देती है। 
  • चौंतो घाटी- गोविन्द सागर झील भी इसी घाटी में स्थित है।
  • दानवीं घाटी- यह घाटी 10 km लम्बी और 5 km छोड़ी है तथा बहादुरपुर और बांदला घाटी के मध्य स्थित है।

बिलासपुर जिले की नदिया (Rivers in Bilaspur District):

  • सतलुज नदी- सतलुज नदी शिमला जिले के साथ कुल्लू की सीमा बनती है।
  • धोलर नदी

बिलासपुर जिले के झीलें (The Lakes in Bilaspur District):

  • गोविन्द सागर झील- हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है, जो की बिलासपुर में है। इस झील का निर्माण सतलुज नदी के पानी के कारण हुआ है। भांखड़ा बांध भी इसी नदी पर बना है। यह बांध 1963 में बनकर तैयार हआ था। और इसकी आधारशिला 1955 में जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी।

बिलासपुर जिले के मंदिर (Temple in Bilaspur District):

  • नैना देवी मंदिर- इसका निर्माण वीरचंद चंदेल ने करवाया था।
  • गोपाल जी मंदिर- इसका निर्माण 1938 में आनंद चंद ने करवाया था।
  • मुरली मनोहर मंदिर- इस मंदिर का निर्माण राजा अभयचन्द ने करवाया था।
  • देवभाटी मंदिर- इस मंदिर का निर्माण राजा दीपचंद ने करवाया था।

बिलासपुर जिले के मेले व यात्रा (Fair in Bilaspur District):

  • नैना देवी मेला- ये अगस्त महीने में लगता है।
  • गुगा मेला- अगस्त और सितम्बर में गेहड़वीं में लगता है।
  • मारकंडा मेला- अप्रैल में  जुखाला में  लगता है।
  • नलवाड़ी मेला- यह एक राज्य स्तरीय मेला है। इसे पशु मेला भी कहा जाता है। 

बिलासपुर जिले की जल विद्युत परियोजना (Hydroelectric project in Bilaspur district):

  • भांखड़ा परियोजना(1325 MW)- 1963 में 226 m ऊंचा बांध BBMB द्वारा सतलुज नदी पर बनाया गया।
  • कोल डैम परियोजना(1000 MW)- 9 मई, 2010 को NTPC द्वारा सतलुज नदी पर बनाई गयी।

बिलासपुर जिले के कुछ मुख्य तथ्य (Some key facts of Bilaspur district):

  • बिलासपुर के दुयोली में एशिया का सबसे बड़ा मछली प्रजनन केंद्र है।
  • कोठीपुरा (बिलासपुर) में गायें और बैलों के लिए प्रजनन केंद्र है।
  • रघुनाथपुरा (बिलासपुर) में बिरोजा उद्योग है।
  • संबसे ज्यादा Sericulture Industries घुमारवी (बिलासपुर) मैं है।
  • खनन और लकड़ी के सामान की फैक्ट्री भी बिलासपुर में है।
  • स्वारघाट में प्राकृतिक गैस और कोठीपुरा में डोलामाइट खनिज के भण्डार पाए जाते है।
  • HPGICL – HP GENERAL INDUSTRY COROPORATION LTD इसके अंतर्गत बिलासपुर में खनन और लकड़ी के सामान की फैक्ट्री लगाई गयी है।
  • HPGICL की स्थापना 1988 में हुई थी।
  • पुराने समय में बिलासपुर को कहलूर राज्य के नाम से जाना जाता था।
  • यंहा की मुख्य भाषा का नाम भी कहलूरी है।
  • बरमाणा (बिलासपुर) में ACC सीमेंट फैक्ट्री है, जो की 1984 में बानी थी।

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