Based on the census report of 1931, caste and tribe living in India

वर्ष 1931 की जनगणना रिपोर्ट के आधार भारत में रहने वाली जाति और जनजाति

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वर्ष 1931 की जनगणना रिपोर्ट के आधार पर डॉ. बी. एस. गुहा का प्रजाति वर्गीकरण सबसे प्रमुख व सर्वमान्य है, जिसका संक्षिप्त विवरण निम्नवत् है –

Based on the census report of 1931, caste and tribe living in India

नीग्रो (Negros) 

नीग्रो (Negros) प्रजाति के लोग मुख्यत: अण्डमान निकोबार द्वीप समूह में पाएँ जाते हैं।  इन्हें भारत के विभिन्न क्षेत्रों में निम्न नामों से जाना जाता है –

  • अंगामी, नागा (मणिपुर तथा कछार पहाड़ी क्षेत्र),
  • बांगडी, इरूला, कडार पुलायन मुथुवान तथा कन्नीकर (दक्षिण भारत)

इस प्रजाति के लोग दक्षिण भारत के केरल राज्य के त्रावणकोर (कोचीन), पूर्वी बिहार की राजमहल पहाड़ियाँ तथा उत्तरी-पूर्वी सीमान्त राज्यों में निवास करते हैं।

प्रोटो-आस्ट्रेलायड अथवा पूर्व-द्रविड़ (Proto-Australoid or Pre Dravidian) 

प्रोटो-आस्ट्रेलायड और पूर्व-द्रविड़ प्रजाति भारतीय जनजातियों में सम्मिश्रित हो गयी है। । • इसके तत्वों का वहन करने वाले दक्षिण भारत में मिलते हैं, जिनसे चेंचु, मलायन, कुरूम्बा, यसबा, मुण्डा, कोल, संथाल तथा भील आदि प्रमुख हैं।

मंगोलायड (Mongoloids) 

इस प्रजाति का निवास हिमाचल प्रदेश, नेपाल के समीपवर्ती क्षेत्र तथा असम राज्यों में है। मंगोलायड 3 प्रजाति उपवर्गों में मिलती है –

  • पूर्व-मंगोलायड (Palaeo-Mongoloids) प्रजाति हिमालय में पाई जाती है।
  • चौड़े सिर वाली प्रजाति के लोग लेप्चा जनजाति में मिलते हैं। तथा बांग्लादेश के चकमा इसी प्रजाति से संबंधित हैं।
  • तिब्बती-मंगोलायड प्रजाति के लोग सिक्किम व भूटान में निवास करते हैं।

द्रविड़ प्रजाति  

भूमध्यसागरीय (Mediterranean) क्षेत्र में निवास करने वाली द्रविड़ (Dravidian) प्रजाति के 3 उपविभाग विद्यमान हैं

  • प्राचीन भूमध्यसागरीय, जो दक्षिण भारत के तेलुगू तथा तमिल ब्राह्मणों में मिलते हैं।
  • भूमध्यसागरीय, जो सिंधु घाटी सभ्यता के जन्मदाता माने जाते हैं तथा ये पंजाब, कश्मीर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कोचीन, महाराष्ट्र तथा मालाबार में मिलते हैं।
  • पूर्वी अथवा सैमेटिक प्रजाति के लोग पंजाब, राजस्थान तथा पश्चिम उत्तर प्रदेश में पाये जाते हैं।

नार्डिक अथवा इण्डो आर्यन (Nordics or Indo-Aryans) 

नार्डिक अथवा इण्डो-आर्यन जाति भारत में सबसे अंत में आने वाली प्रजाति है। वर्तमान में इनका निवास उत्तर भारत में पाया जाता है। राजपूत, सिख आदि इसी जाति के माने जाते हैं।यह चौड़े सिर वाली जाति (Broad Headed) यूरोप से भारत में आयी मानी जाती है। इसके 3 प्रमुख उपवर्ग हैं –

  • एल्पोनॉइड (Alponoids), जो सौराष्ट्र (काठी), गुजरात (बनिया), पं. बंगाल (कायस्थ), महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश आदि में निवास करती हैं।
  • डिनारिक (Dinaric), जो भूमध्यसागरीय प्रजाति के साथ पायी जाती है।
  • आर्मेनाइड (Armenoids) जिसके प्रतिनिधि मुंबई के पारसी, पश्चिम बंगाल के कायस्थ, श्रीलंका की वेद्दा प्रजाति के लोग हैं।

भारतीय संविधान में इन्हें (अनुच्छेद-342 के अंतर्गत) अनुसूचित जनजाति कहा गया है जबकि वर्तमान में इनको आदिवासी वन्यजाति तथा अरण्यवासी, हरिजन आदि नामों से जाना जाता है।

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